अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। डोडरा क्वार की जाखा पंचायत के प्रधान और सचिव पर पंचायत निधि के दुरुपयोग करने की गाज गिरी है। प्रधान उमेश कुमार को 14वें वित्तायोग में कांट छांट, जलागम योजनाओं का धन ऐंठने, पंचायत निधि का गलत उपयोग और पंचायत दस्तावेजों में लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी राशि में गोलमाल के आरोप में प्रधान पद से निलंबित कर दिया गया है। उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है।
वहीं पंचायत सचिव सोहन लाल के प्रारंभिक जांच में आरोपी पाए जाने के बाद नियमित जांच करने के लिए एडीएम प्रोटोकाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। आरोप है कि दोनाें ने मिलीभगत कर करीब 12 लाख रुपये धनराशि का दुरुपयोग किया। जिला प्रशासन और अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने प्रधान और सचिव को 19 सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा था। जिला पंचायत अधिकारी एमएस नेगी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सचिव पर लगे आरोप सही पाए जाने के उपरांत नियमित जांच करने के आदेश दिए गए हैं। नेगी ने बताया कि आरोपी पाए जाने पर सचिव की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। उधर, प्रधान उमेश कुमार का कहना है कि आरोप गलत हैं, उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।
ये लगे हैं आरोप
ग्राम सभा की ओर से चयनित योजनाओं को अपने स्तर पर बदला और खरीदे गए पौधों को सरकारी रेटों से अधिक कीमत पर खरीदा गया। लाभार्थियों को पौधे कम दिए और रजिस्टर में पूरे दिखाए गए। वहीं रजिस्टर में लाभार्थियों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए। पंचायती राज अधिनियम/वित्त नियम 2002 के प्रावधानों का उल्लंघन करके 8 लाख 24 हजार 200 रुपये का दुरुपयोग किया। पंचायत निधि 13वें और 14वें वित्तायोग से तीन लाख रुपये की धनराशि बिना औपचारिकताएं पूरी कर मरम्मत के लिए निकाली गई। लेकिन वह धनराशि विकास कार्यों पर खर्च की बजाय सीधे पंचायत प्रधान की निजी खाते में जमा की गई। ग्राम पंचायत कार्यालय के फर्नीचर लिए बिना बजट प्रावधान और ग्राम पंचायत में पारित किए बिना 72 हजार की राशि निकाली गई। लेकिन निकाले गई धनराशि से फर्नीचर पंचायत में उपलब्ध नही करवाई गई। ग्राम पंचायत में डिजिटल राशन कार्ड जारी करने के लिए गृह कर के तौर पर 54 परिवारों के 5940 रुपये वसूले गए, लेकिन पंचायत सचिव ने राशि पंचायत खाते में जमा करने की बजाय अपने पास रख दी।