शहर में मीटर रीडिंग पर बिलिंग शुरू होते ही पानी की बर्बादी भी घटने लगी है। ज्यादा बिल के डर से शहर में न सिर्फ टंकियां ओवरफ्लो होना बंद हो गई हैं बल्कि घरेलू खपत भी घट गई है। पेयजल कंपनी के अनुसार मीटर रीडिंग के बाद शहर में पानी की खपत चार एमएलडी यानि 40 लाख लीटर तक घट गई है। पहले शहर में रोज सप्लाई देने के लिए परियोजनाओं से 48 एमएलडी तक पानी लिफ्ट किया जाता था।
लेकिन अब 44 एमएलडी के बाद ही पंपिंग बंद करनी पड़ रही है। रोज देर शाम शहर के स्टोरेज टैंक फुल होने के बाद गिरि और गुम्मा परियोजनाओं के पंप बंद करने पड़ रहे हैं। सैकड़ों उपभोक्ताओं ने टंकिंया ठीक करवा दी हैं ताकि ओवरफ्लो न हो। लीकेज को लेकर भी कई शिकायतें आई हैं जिन्हें ठीक किया जा रहा है। 20 हजार लीटर तक खपत करने वाले परिवारों को कंपनी 14.50 रुपये किलोलीटर की दर से बिल दे रही है। ऐसे में ज्यादातर परिवार पानी की कम खपत कर इस स्लैब में बिल ले रहे हैं।
52 फीसदी उपभोक्ताओं का घट गया बिल
पेयजल कंपनी उपभोक्ताओं को लेकर एक सर्वे भी कर रही है। अब तक के सर्वेक्षण में सामने आया है कि शहर में 52 फीसदी घरेलू उपभोक्ता यानि 12 हजार से अधिक परिवार ऐसे हैं जिनका इस बार बिल फ्लैट रेट से भी कम आया है। कम खपत के बावजूद इन्हें अब तक बाकी परिवारों की तरह फ्लैट रेट पर 390 रुपये बिल देना पड़ रहा था। अब इनका बिल 300 से लेकर 380 तक बैठ रहा है। इसी तरह 58 फीसदी व्यावसायिक उपभोक्ताओं का भी बिल कम आया है।
छोटे परिवारों को फायदा
मीटर रीडिंग से हजारों छोटे परिवारों को फायदा हुआ है और इनका बिल कम हो गया है। शहर में पानी की खपत भी थोड़ी घटी है। लोग खुद ओवरफ्लो टंकियां और लीकेज ठीक करवा रहे हैं। - धर्मेंद्र गिल, प्रबंध निदेशक, शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड