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चार्ज ही नहीं हो रहीं लाखों की नई इलेक्ट्रिक टैक्सियां

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अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। एचआरटीसी की ओर से शिमला में शुरू की गई तीन इलेक्ट्रिक टैक्सियां चार्ज नहीं हो रही। गाड़ियां चार्ज न होने के कारण इन गाड़ियों को रूटों पर चलाना मुश्किल हो गया है। शनिवार को इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा के उद्घाटन के लिए एचआरटीसी ने सोलन, नालागढ़, रोहड़ूू और रामपुर से टैक्सियां मंगवाई थी। हालांकि यह टैक्सियां तीन साल की वारंटी पर हैं। तीन सालों तक कंपनी को मुफ्त में गाड़ियों की मरम्मत करनी होगी।
शिमला सहित पूरे प्रदेश भर के लिए यह टैक्सियां करीब चार महीने पहले आ चुकीं हैं। संचालन को लेकर औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण यह टैक्सियां वर्कशाप में धूल फांक रही थीं। शिमला के ढली स्थित एचआरटीसी वर्कशाप में महीनों से यह टैक्सियां खड़ी थीं। एक ही जगह खड़ी रहने और चार्जिंग न होने के कारण कुछ गाड़ियों में बैटरी डाउन हो गई। अब इन गाड़ियों को चार्ज करने की कोशिश की जा रही है तो यह चार्जिंग ही नहीं ले रही। हालांकि उद्घाटन से एक दिन पहले शुक्रवार को इन टैक्सियों का टेस्ट ट्रायल भी किया गया था बावजूद इसके एकाएक गाड़ियों में तकनीकी खराबी आ गई है।
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बैटरी में आ रही है दिक्कत, इंजीनियरों को बुलाया है
बाहरी क्षेत्रों से आईं कुछ इलेक्ट्रिक टैक्सियों की बैटरी में दिक्कत आ रही है। कंपनी के इंजीनियरों को गाड़ियां ठीक करने के लिए बुलाया गया है। हमारे पास रिजर्व टैक्सियां उपलब्ध हैं इसलिए समस्या के कारण कोई रूट प्रभावित नहीं होगा।
- डॉ. अश्वनी कुमार शर्मा, कार्यकारी निदेशक, एचआरटीसी।
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प्रदेश भर में चलाई जानी हैं 50 इलेक्ट्रिक टैक्सियां
देश की इस पहली इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा को केंद्र सरकार की फास्ट अडॉप्शन एंड मैन्युफेक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स फेम योजना के तहत शुरू किया गया है। प्रदेश में अलग-अलग इलाकों के रूटों पर कुल 50 इलेक्ट्रिक टैक्सियां चलाई जाएंगी। सेवा की शुरुआत शनिवार को शिमला से की गई है।
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95 हजार में मिली साढ़े नौ लाख की टैक्सी
केंद्रीय योजना के तहत इलेक्ट्रिक टैक्सियाें की खरीद में प्रदेश सरकार को प्रति टैक्सी महज 95 हजार रुपये की मिली है जबकि, इस टैक्सी का कुल मूल्य साढ़े नौ लाख रुपये है। योजना के तहत वाहन की खरीद पर केंद्र सरकार 90 फीसदी अंश देती है और प्रदेश सरकार को सिर्फ दस फीसदी का खर्च ही वहन करना पड़ता है।
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