अमर उजाला ब्यूरो
शिमला।
विश्वविद्यालय को आर्थिक संकट से कई बार उबारने वाले एचपीयू के अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा एवं मुक्त अध्ययन केंद्र (इक्डोल) को विवि के कंप्यूटराइजेशन और वेब एनेबल्ड प्रोजेक्ट से बाहर रखा गया है। अब इक्डोल को ऑनलाइन और वेब एनेबल्ड बनाने के लिए अलग से लाखों का बजट खर्च करना पड़ेगा। ऐसा करने पर ही इक्डोल के छात्रों को आनलाइन प्रवेश से लेकर परीक्षा परिणाम तक की सुविधा नसीब हो पाएगी। एचपीयू के एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) प्रोजेक्ट पर कार्य चल रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार से चार करोड़ की राशि मिली है। इक्डोल को ऑनलाइन और कंप्यूटराइज्ड करने के लिए कुलपति ने कमेटी को मंजूरी दी है। इक्डोल एचपीयू का दूरवर्ती मोड़ से पढ़ाई की सुविधा देने वाला संस्थान है, जिसमें वर्तमान में करीब 40,000 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इक्डोल को सालाना इन छात्रों से ही फीस के रूप में करोड़ों की आय होती है। इक्डोल को आज तक एचपीयू का ही हिस्सा माना जाता रहा है, मगर इसे वेब एनेबल्ड ऑनलाइन किए जाने के प्रोजेक्ट में शामिल ही नहीं किया गया। जबकि इक्डोल के छात्रों को भी विवि ही डिग्री देता है। इक्डोल से किए इस सौतेले व्यवहार के चलते अब इक्डोल प्रशासन को अपने पूरे सिस्टम को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया को अपने स्तर पर ही करना होेगा।
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इक्डोल अॅानलाइन करने को वीसी ने बनाई है 14 सदस्यीय कमेटी
शिमला। इक्डोल निदेशक प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने कहा कि इक्डोल की प्रवेश प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए अलग से कुलपति ने 14 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी जल्द बैठक कर प्रोजेक्ट के लिए किए गए कार्यों और प्लान तैयार करेगी। उसी के मुताबिक इक्डोल में प्रवेश प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा।
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छात्रों को घर-द्वार मिलेगी इक्डोल से संबंधित हर जानकारी
निदेशक प्रो. पीके वेद ने कहा कि पहले चरण में छात्र प्रवेश प्रक्रिया और उन्हें कोर्स से संबंधित हर सूचना को घर द्वार आनलाइन देने का कार्य पूरा किया जाएगा। अगले चरण में इक्डोल के कर्मचारियों, शिक्षकों और विभागों को ऑनलाइन किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।