अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहली बार इस्तेमाल की जा रही वीवीपैट मशीनें कर्मचारियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। तकनीकी खराबी और प्रशिक्षण की कमी के चलते अभी ज्यादातर कर्मचारी इनका ठीक से संचालन नहीं कर पा रहे हैं। उपायुक्त कार्यालय में कर्मचारियों को प्रशिक्षण के लिए दी गई कई मशीनें खराब पाई गई हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्वाचन आयोग ने बंगलूरू से इंजीनियर्स की टीम को बुलाया। टीम ने बुधवार को सभी मशीनें चेक कीं। जिनमें तकनीकी खराबी थी, उन्हें दुरुस्त कर दिया गया। जिला निर्वाचन अधिकारी रोहन चंद ठाकुर ने माना कि धूप में मशीनें रखने से इनके सेंसर खराब हो गए थे। इन्हें चेक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग के लिए दूसरी मशीनें दी गई हैं। जो मशीनें पोलिंग स्टेशन पर भेजी जानी हैं, उन्हें पहले चरण में चेक किया जा चुका है। उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल होने के बाद दूसरे चरण में फिर इनकी जांच की जाएगी। 29 अक्तूबर को कर्मचारियों को इस सिस्टम से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
सिस्टम में आ रही यह खराबी
उपायुक्त कार्यालय में कर्मचारियों को जो मशीनें दी गई हैं, उनमें ईवीएम में बटन दबाने पर वोट तो डल रहा है लेकिन वीवीपैट में प्रत्याशी की फोटो दिखने की बजाय एरर शो हो रहा है। इन मशीनों में फोटो सेंसर लगे हैं और इसकी स्क्रीन लाइट सेंसेटिव है। सूरज या बिजली की सीधी रोशनी पड़ने से कई मशीनें काम करना बंद कर रही हैं। हालांकि, अब इस खराबी को ठीक किया जा रहा है। पोलिंग बूथों पर भी इन मशीनों को सीधी रोशनी से दूर लगाने की बात कही जा रही है।
क्या है वीवीपैट
मतदान में निष्पक्षता लाने के लिए इस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। मतदाता जैसे ही बटन दबाकर किसी प्रत्याशी को वोट देगा, उसके सात सेकेंड के भीतर वीवीपैट पर उस प्रत्याशी का फोटो प्रदर्शित हो जाएगा। इससे मतदाता को जानकारी रहेगी कि उसका मतदान सही हुआ है या नहीं।