मंडी। शहरियों का 24 घंटे पानी का सपना अभी पूरा नहीं हो पाया है। भारी भरकम पानी के बिलों की मार से जूझ रहे मंडी शहर और आसपास के गांवों के लोगों को यह सुविधा अगले वर्ष तक ही मिल पाएगी। यह योजना तो बनकर तैयार नहीं हुई लेकिन चुनावी रण के लिए मुद्दा बनने को तैयार है। विभाग ने इस योजना को पूर्ण करने का लक्ष्य सितंबर 2017 रखा था। लेकिन, महज 54 फीसदी कार्य ही अभी तक पूरा हो पाया है। मंत्री अनिल शर्मा के वादों में यह योजना भी गत वर्ष के चुनावों में शुमार थी। लेकिन, विभागीय लेटलतीफी से योजना भी वन विभाग की अनुमति के फेर में फंस कर अभी पूरी नहीं हो पाई है। इस योजना को भी विस चुनावों में मुद्दा बनाने में नेता जुटे हुए हैं।
फोरेस्ट क्लीयरेंस ने बढ़ाई दिक्कतें
प्रदेश की सबसे बड़े बजट की यह स्कीम तय समय सीमा में आईपीएच विभाग नहीं बना पाया है। शहर की लगभग तमाम सड़कों को भारी बरसात में खोदने के बाद भी विभाग इस योजना का महज 54 फीसदी कार्य ही पूरा कर सका है। अभी तक मेन ग्रेविटी लाइन को ही विभाग नहीं बिछा पाया है। यहां पर फोरेस्ट क्लीयरेंस की दिक्कत विभाग को पेश आ रही है। योजना के तहत बनने वाले दो ट्रीटमेंट प्लांटों का कार्य भी अरसे से वन विभाग से मंजूरी न मिलने के कारण अटका हुआ था। जिसे अब विभाग ने शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत कांगणी और ढ़ागसीधार दो प्लांट बनने हैं। वहीं, ग्रेविटी मेन के लिए वन विभाग की क्लीयरेंस के फेर में उलझे विभाग को हाल ही मंजूरी मिली है। इस योजना के तहत 10 छोटे बड़े ट्रीटमेंट प्लांटों का निर्माण किया जाएगा।
मंडी शहर से सटे गांवों को भी मिलना था लाभ
उहल नदी का पानी छोटी काशी मंडी के बाशिंदों की प्यास बुझाएगा। प्रदेश की सबसे बड़े बजट की इस परियोजना का काम वर्ष 2017 में लगभग पूरा हो जाएगा। प्रदेश में आईपीएच विभाग पहली ग्रेविटी संचालित पेयजल योजना बना रहा है। जिस पर 82 करोड़ खर्च हो रहे हैं। इस योजना से मंडी शहर के साथ आस-पास के गांवों को भी जोड़ा गया है। जिन्हें भी 24 घंटे पानी उपलब्ध होगा। मंडी शहर के अलावा साथ लगते सन्याहरड़, नेला, चंडयाणा, छिपणू, बिजनी, तल्याहड़, बाड़ी, पंजेहटी, मडवाहन, और भ्यूली गांवों को भी उहल पेयजल परियोजना से जोड़ा जाएगा। परियोजना में ऐसी पाइपों का प्रयोग हो रहा है जो अंदर और बाहर दोनों ओर से जंग रोधक हैं।
जल्द कार्य होगा पूरा : अनिल
पंचायती राज मंत्री एवं स्थानीय विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि योजना का कार्य अंतिम चरण में है। जल्द ही शहरियों को 24 घंटे पानी की सुविधा मिलेगी। वन विभाग की क्लीयरेंस मिलने में देरी से योजना का कार्य पूरा होने में देरी हुई है।
अनिल शर्मा देरी के लिए जिम्मेवार : नरेंद्र
भाजपा के राष्ट्रीय विधि प्रकोष्ठ के कार्यकारिणी सदस्य नरेंद्र गुलेरिया ने कहा कि उहल परियोजना के तहत 24 घंटे पानी की सुविधा शहरियों को मिलनी थी। लेकिन, स्थानीय विधायक और मंत्री अनिल शर्मा की नाकामी के कारण यह योजना तय समय में नहीं बन सकी है। शहरी पानी के भारी भरकम बिल चुका रहे। इसके लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह से जिम्मेवार है।