मेले के दौरान मंदिर में प्रतिदिन लगाया जाता है लंगर संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। प्रदेश के प्रसिद्ध जैईश्वरी माता मंदिर धरेच, केलियाघाट में दशहरा मेला चल रहा है। मेले के चौथे दिन बुधवार को करीब 20 हजार श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए।
माता के जयकारों से समूची धरेच घाटी गूंज उठी। माता नगरकोटी हर वर्ष शरद नवरात्र की अष्टमी से पूर्णिमा तक केलियाघाट स्थित मंदिर में भक्तों को दर्शन देती हैं। माता के वजीर शिवराम शर्मा ने बताया कि जैईश्वरी माता का इतिहास प्रदेश के शक्तिपीठों से जुड़ा है। कांगड़ा की ब्रजेश्वरी माता का धरेच में प्रादुर्भाव हुआ था। इस कारण धरेच में माता नगरकोटी की सिद्धपीठ मानी जाती है। हर वर्ष शरद नवरात्र में दुर्गाष्टमी से पूर्णिमा तक मंदिर में दशहरा मेले का आयोजन होता है। एकादशी के दिन बड़े मेले का आयोजन किया जाता है।
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माता के दर्शन ही आकर्षण का मुख्य केंद्र होते हैं। इसके अलावा मेले में कोई अन्य गतिविधि नहीं होती है। दूरदराज के क्षेत्रों, विशेषकर रतेश, फागू, क्योंथल और धरेच से लोग मंदिर में मनौतियां मांगने आते हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने छोटे बच्चों का मुंडन संस्कार करवाने के लिए भी मंदिर पहुंचते हैं। वजीर शिवराम शर्मा के अनुसार जैईश्वरी नगरकोटी माता निःसंतान दंपतियों की गोद भर देती हैं।
मेले के दौरान विभिन्न गांवों के कारिंदों की ओर से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन लंगर लगाया जाता है। बगोल, धारठी, सौंथल, रिहाड़, बटनाली और खगनाल के लोग लंगर सेवा में योगदान देते हैं। एकादशी के अवसर पर आयोजित लंगर में करीब दस क्विंटल चावल की खपत होती है। अतीत में इस मंदिर में बलि प्रथा प्रचलित थी। माता के पूर्व वजीर मोती राम शर्मा ने उच्चतम न्यायालय के आदेश आने से पहले ही इस प्रथा को बंद करवा दिया था।