दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन) में स्क्रब टायफस के टेस्ट बंद हैं। इस सीजन में स्क्रब टायफस के टेस्ट बंद होने के कारण मरीजों की जान जोखिम में है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन भी इस समस्या का समाधान नहीं कर पाया है। अस्पताल में सप्ताह भर से मरीजों के टेस्ट तक नहीं हो रहे हैं, जबकि दूसरी ओर मरीज या तो आईजीएमसी आकर दोबारा से चिकित्सकों को दिखाकर इस टेस्ट को करवाने की बात कह रहे हैं, जबकि जो लोग जागरूक नहीं है वे बाद में टेस्ट करवाने की बात कहकर लौट रहे हैं।
जोनल अस्पताल डीडीयू में स्क्रब टायफस के होने वाले टेस्ट बंद पड़े हैं। बताया जा रहा है कि टेस्ट किट न हो पाने के कारण यह समस्या पेश आई है, जबकि दूसरी ओर से मरीजों को चिकित्सक टेस्ट करवाने की बात कह रहे हैं तो उन्हें काउंटर से टेस्ट न हो पाने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। जबकि सीजन में रोजाना औसतन 25 से 30 टेस्ट मरीजों के किए जाते हैं। जबकि तीन से पांच मरीज के टेस्ट के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, लेकिन टेस्ट न हो पाने के कारण मरीजों को दिक्कतें झेलने को मजबूर है। जबकि अस्पताल प्रबंधन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे पा रहा है। लिहाजा प्रबंधन की किट को लाने की देरी मरीजों पर भारी पड़ रही है, जबकि शहर के सबसे नजदीक अस्पताल होने के चलते शिमला, समरहिल, टुटू, जुब्बड़हट्टी, छोटा शिमला, संजौली, ढली कुफरी, ठियोग के अलावा आसपास के इलाकों से रोजाना सैकड़ों लोग यहां इलाज के लिए आते हैं।
अस्पताल में हो रहे मरीजों के टेस्ट
डीडीयू अस्पताल में मरीजों के स्क्रब के टेस्ट किए जा रहे है। किसी भी मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो रही है।
- डॉ. रंजना रॉव - वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, डीडीयू
टेस्ट किट खत्म होने के बाद दिया जा रहा यह तर्क
अस्पताल में रोजाना आने वाले सभी संदिग्ध मरीजों को डॉक्टर स्क्रब टेस्ट करवाने को कहते हैं, लेकिन अस्पताल में किट की संख्या कम रहती है, जिसके चलते यह किट खत्म हो जाती है। ऐसे में कुछ लोग यह सलाह दे रहे कि डॉक्टर पहले मरीजों के लक्षण पूछ लें ताकि किट खत्म न हो। लेकिन कर्मियों द्वारा कही यह बात समझ से परे हं।