शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में लोगों को बी नेगेटिव खून नहीं मिल रहा है। खून न मिल पाने के कारण सर्जरी करवाने आ रहे मरीज दिक्कतें झेलने को मजबूर हैं। तीमारदार शहर के अन्य अस्पतालों के ब्लड बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जबकि इन अस्पतालों में तीमारदारों को रक्त न मिल पाने के कारण खूब माथापच्ची करनी पड़ रही है।
डीडीयू और केएनएच अस्पताल में इन दिनों रक्त की मांग को लेकर लोगों की भीड़ लग रही है। जबकि दूसरी ओर, जुगाड़ तंत्र लगाकर भी अपने मरीज के ऑपरेशन के लिए तीमारदार जद्दोजहद करके रक्त का प्रबंध करवा रहे हैं। आईजीएमसी में इस ब्लड ग्रुप के रोज औसतन दस से बारह सर्जरी की जाती है। ऐसे में ऐन मौके पर रक्त न मिल पाने के कारण लोग परेशान हो रहे हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि नेगेटिव ब्लड ग्रुप के रक्तदाताओं को कॉल करके बुलाया जा रहा है। जबकि शहर के कुछ एक अस्पतालों में मरीजों को रक्त न मिल पाने के कारण दिक्कतें पेश आ रही है। उधर, अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने बताया कि कॉलेज और विश्वविद्यालय के अधिकांश युवा छात्र छुट्टी पर है। ऐसे में समस्या आ रही है। लेकिन आपातकालीन स्थिति में डोनरों को बुलाकर रक्त मरीजों को मुहैया करवाया जा रहा है।
इनसेट
बी पॉजिटिव खून भी नहीं मिल रहा
आपातकालीन स्थिति में आर्थो के कुछ ऐसे मरीज भी हैं, जिन्हें बी पॉजिटिव खून की आवश्यकता है। लेकिन यह ग्रुप भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में डॉक्टरों को भी आगामी इलाज करवाने में काफी समस्या आ रही है।
जनवरी में लगे कैंप, लेकिन कम मिले नेगेटिव ग्रुप के डोनर
जनवरी माह में भी कैंप लगे थे। लेकिन उनमें अधिकतर ए पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव जैसे ब्लड ग्रुप अधिक मात्रा में एकत्र हुए थे। जनवरी माह के अंत में केएनएच के लिए भी शिविर लगा था। इसमें सोलह यूनिट खून आया था। इनमें भी तीन या चार यूनिट ही नेगेटिव ग्रुप के थे थे।
आने वाले दिनों में नहीं है ब्लड कैंप लगने की सूचना
सूत्रों के मुताबिक अभी कुछ दिनों तक ब्लड डोनेशन कैंप लगने की कोई सूचना नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी इस ब्लड ग्रुप के पूरी तरह न मिलने की आशंका है। ऐसे में डोनर को कॉल करके ही आपातकालीन स्थिति में रक्त मुहैया हो सकता है।