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लाइब्रेरी में फर्श पर बैठकर छात्र कर रहे प्रशासनिक सेवा परीक्षा की पढ़ाई

Fri, 15 Jun 2018 12:21 PM IST
दीपक मेहता, अमर उजाला, शिमला
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स्टेट लाइब्रेरी में पढ़ाई करने पहुंच रहे युवाओं को लाइब्रेरी में फर्श पर बैठकर प्रशासनिक सेवा परीक्षा की पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालत यह है कि छात्रों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।

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युवाओं को लाइब्रेरी के बहार घंटों लाइनों में खड़ा रहने के बावजूद सीटों पर बैठने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हैरत की बात यह है कि 45 सीटों की लाइब्रेरी में करीब तीन गुना अधिक संख्या में छात्र पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

संध्याकालीन कॉलेज परिसर में चल रही स्टेट लाइब्रेरी में अफसर बनने की चाहत में पढ़ाई करने के लिए छात्र सुबह पांच बजे से ही पहुंचने शुरू हो जाते हैं। यहां पहुंच कर छात्र सबसे पहले अपने बैगों को लाइब्रेरी गेट के सामने लाइनों में लगा देते हैं। इस दौरान छात्र परिसर के बाहर ही पढ़ाई करते हैं।
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आठ बजे लाइब्रेरी खुलते ही छात्र लाइनों में रखे अपने बैगों को उठाते हैं और लाइब्रेरी में प्रवेश करते हैं। इस दौरान छात्र पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर सीटों पर बैठते हैं। सीटों की संख्या भरने के बाद सैकड़ों छात्र फर्श पर ही बैठ जाते हैं।

इस दौरान कुछ छात्रों को सीट न मिलने के कारण मायूस होकर परिसर के बहार बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यहीं नहीं, यहां पर छात्र-छात्राओं के लिए एकमात्र शौचालय की व्यवस्था है। इन छात्रों को शौचालय में जाने के लिए लाइनों में खड़े रहकर बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।

छात्र ज्यादा और जगह कम
जुब्बड़हट्टी की नम्रता ने बताया कि एक घंटा लाइन में खड़ा रहकर भी लाइब्रेरी में बैठने के लिए सीट नहीं मिल रही है। छात्र बहुत ज्यादा हैं और बैठने के लिए जगह कम है।

लाइन में रख देते हैं बैग
संजौली की देवांशी ने बताया कि लाइब्रेरी में सीट पाने के लिए सुबह सवा पांच बजे घर से लाइब्रेरी के लिए चलते हैं। पौने छह बजे यहां पहुंचने के बाद बैग लाइनों में रख देते हैं और गेट खुलने तक बहार ही पढ़ाई करते हैं।

दो घंटे करना पड़ता है इंतजार
विकासनगर के पवन सुबह छह बजे लाइब्रेेरी पहुंचे। उन्होंने बताया कि दो घंटे खड़े रहने के बाद पहले आओ पहले पाओ के आधार पर सीटें भर जाती हैं। सीटें भर जाने के बाद फर्श पर बैठना पड़ रहा है।

सीट पर रख देते हैं सामान
भराड़ी की यमुना ने बताया कि जो छात्र एक बार सीट पर अपना सामान रख देता है, उस सीट पर कोई और नहीं बैठ सकता है। चाहे उसकी सीट दिन भर खाली हो। बताया कि उपरोक्त छात्र के आने पर सीट छोड़नी होगी।
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सहपाठी के लिए बुक करवा देते हैं सीट
टुटू के सुरेंद्र ने बताया कि कुछ छात्र अपने सहपाठी के लिए सीट बुक करवा देते हैं। इससे घंटों लाइनों में खड़े रहने के बाद भी सीट नहीं मिल पाती है।

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