अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। मशोबरा स्वास्थ्य केंद्र की हालत खुद नाजुक बनी हुई है। बीस बिस्तरों वाले स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे मरीजों को सुविधाएं देने का दावा किया जाता है। सुबह के समय ओपीडी होती है। चिकित्सक खांसी, बुखार और अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को इलाज भी देते हैं, लेकिन जब दवा लेने के लिए मरीज काउंटर पर जाता है तो पर्ची पर लिखी तीन या चार दवाओं में से एक, दो दवाएं ही मिल पाती हैं। बाकी बची दवाओं को लेने के लिए मरीज को निजी केमिस्ट की दुकान की ओर रुख करना पड़ता है। एक ओर जहां मरीजों को मुफ्त दवा देने की बात कही जाती है तो दूसरी तरफ यहां के हालात कुछ और ही बयां करते हैं। मरीज दवा लेने के लिए काउंटर पर पांच दस मिनट इंतजार भी करते हैं, लेकिन दवा न मिलने से मायूस होते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में खोला गया यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही बीमार है तो यहां आने वाले मरीज कैसे ठीक होंगे?
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150 रुपये में खरीदा इंजेक्शन
निखिल ठाकुर को एलर्जी है। चिकित्सकों ने इंजेक्शन लगाने की सलाह दी। ड्रेसिंग रूम पहुंचे तो वह स्टाफ का इंतजार कर रहे थे। पूछने पर बताया कि इंजेक्शन लगना है। बाहर से 150 रुपये में इंजेक्शन को खरीदा है। यहां यह इंजेक्शन नहीं था।
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मल्टी विटामिन दवा लेनी है बाहर से
कुफ्टू की रीता अपनी सात साल की बेटी रिद्धिमा के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी। चिकित्सक ने उपचार दिया लेकिन बच्ची को जो मल्टी विटामिन दवा केंद्र से मिलनी थी। वह उन्हें नहीं मिल पाई। दवा न मिलने के बाद वह वहां से लौट आई।
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सोमवार को होंगे टेस्ट
अमर उजाला की टीम जब केंद्र में पहुंची तो यहां पर मरीजों के टेस्ट भी नहीं हो पाए। पूछने पर बताया गया कि तकनीशियन छुट्टी पर है। ऐसे में एचबी, थूक टेस्ट, एचआईवी, शुगर और कंपलीट हीमोग्लोबिन टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को सोमवार को आना होगा।
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दवाओं की कहां होती है देरी यह भी लगा पता
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं का टोटा तो है, लेकिन मरीजों को समय पर दवाएं मिले इसके लिए इंडेट समय पर भेजा जाता है। लेकिन सेंटरों से दवाएं लेने में काफी दिक्कत आती है। समय पर दवाइयों का स्टॉक नहीं मिल पाता है। इसको लेकर भी यह चिंता का विषय बना हुआ है। सूत्रों का कहना है कि जनऔषधी केंद्रों से भी सप्लाई मंगवाई जाती है, लेकिन वहां से भी तत्काल सप्लाई नहीं मिल पाती है। जिसके कारण परेशानी रहती है।
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स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं का टोटा
जब इलाज के बाद दवा लेने के लिए काउंटर पर भेजा जाता है तो पर्ची पर लिखी इक्का और दुक्का दवा के मिलने के बाद बाकी की दवा को महंगी दर पर बाहर से खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। इस स्वास्थ्य केंद्र में दवाइयों का टोटा है। हालत है कि मरीज बाहर से पैसे देकर दवाएं और इंजेक्शन खरीद रहे हैं। ओपीडी में एलर्जी से परेशान होकर मरीज पहुंच रहे हैं। इन्हें इंजेक्शन लगाने की सलाह दी जा रही है। लेकिन एलर्जी में लगने वाला एविल इंजेक्शन को मरीज बाहर से डेढ़ सौ रुपये में खरीदकर ला रहे है। वहीं बच्चों के लिए बी कांपलेक्स जैसे मल्टी विटामिन भी उपलब्ध नहीं हैं।