66 साल के सोनम अंगदुई ने बताया कि सुबह तीन बजे से 12 बजे तक बर्फ पर चलने के बाद वह आराम करते। 28 साल के लोबजंग ने बताया कि पहले दिन वह लोग ईचर से 40 किमी दूर टेस्ता तक चले। दूसरे दिन टेस्ता से 20 किमी दूर करग्या और तीसरे दिन 18 किमी दूर लरखांग पहुंचे।
चौथे दिन 15 हजार फीट ऊंचे शिंकुला दर्रे को पार कर 25 किमी दूर हिमाचल की सरहद रामचाग पहुंचे। पांचवें दिन रामचाग से जंस्कर-समदो तक 20 किमी का सफर पूरा किया। छठे दिन 15 किमी चलकर समदो से दारचा पहुंचे। इनमें 8 स्कूली बच्चे और 10 अभिभावक शामिल हैं। यह लोग जंस्कर के तेता, मर्लिंग, ईचार, डांगड़ो, गुर, करग्या और यंगसो गांव के रहने वाले हैं।
रोहतांग सुरंग से मनाली पहुंचाने के लिए प्रबंधन से बात
एसडीएम केलांग अमर नेगी ने इन लोगों को रोहतांग टनल होकर मनाली पहुंचाने के लिए टनल प्रबंधन से बात की है। नेगी ने बताया कि केलांग के पूर्व प्रधान की अगुवाई में जंस्कर के लोग उनसे मिले। 4 साल की तंजिन, 13 साल की तंजिन अंगमो, 12 साल की छोडचो, 15 साल की तंजिन यनजोर, 13 साल की तंजिन रिंचेन्न, 13 की लक्पा, सात साल का तंजिन पलमो, छह साल का तंजिन कलजंग और छह साल का तंजिन खेलड़ंग शामिल हैं।