अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में ट्रैफिक जाम के कारण लोगों का सड़कों पर वाहनों को चलाना परेशानी भरा हो गया है। लोगों को मिनटों के सफर में घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाला सर्कुलर रोड का निर्माण अंग्रेजों ने घोड़े की कार्ट को चलाने के लिए किया था लेकिन मौजूदा समय में शहर का सारा ट्रैफिक इसी सड़क से आवाजाही कर रहा है। शहर के ट्रैफिक को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने बैम्लोई से टूटीकंडी बाईपास सड़क निर्माण शुरू करने के लिए सर्वे किया था लेकिन दो साल बीत जाने के बाद आज तक सड़क का निर्माण पूरा तो दूर, शुरू तक नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सड़क निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। दो साल बीत जाने के बावजूद सर्कुलर रोड के इस वैकल्पिक मार्ग का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। शहर की सबसे मुख्य सर्कुलर रोड पर ट्रैफिक बढ़ जाने से घंटों जाम लगा रहता है। टूरिस्ट सीजन के दौरान जाम की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। सड़क पर वाहन रेंगने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जाम से निजात दिलाने के लिए सीएम ने लोनिवि को बाईपास के लिए वैकल्पिक मार्ग निकालने के लिए निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देशों के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन पाई।
सीएम की घोषणा के बाद हुआ सर्वे
सीएम की घोषणा के बाद हालांकि बैम्लोई से बाईपास दाड़नी के बागीचे के लिए सड़क का सर्वे भी किया गया। सर्वे पूरा होने के बाद विभाग ने जमीन से संबंधित विभागों को संपर्क किया। लोनिवि ने सीपीडब्ल्यूडी, राजस्व विभाग और वन विभाग को संयुक्त निरीक्षण के लिए बुलाया। निरीक्षण के दौरान वन विभाग जमीन देने के लिए सहमत हो गया लेकिन सीपीडब्ल्यूडी ने जगह देने के लिए इनकार कर दिया। तर्क दिया गया कि सर्वे सीपीडब्ल्यूडी की आवासीय कॉलोनी के बीच से हुआ है। सर्वे कॉलोनी से बदलकर बाहर से किया जाए। उसके बाद पीडब्ल्यूडी ने कॉलोनी से बाहर भी सर्वे किया है।
शहर को ट्रैफिक जाम से मिलनी थी निजात
बैम्लोई से दाड़नी के बागीचे तक वैकल्पिक सड़क का निर्माण होने से सर्कुुलर रोड पर करीब 30 प्रतिशत तक ट्रैफिक कम हो जाएगा। बाहरी राज्यों के लिए जाने वाले वाहन भी इस मार्ग से सीधा बाईपास सड़क जा सकते हैं और साथ ही फागली, टुटीकंडी, दाड़नी का बागीचा, लालपानी से शहर की तरफ आने वाला ट्रैफिक भी इसी सड़क से सीधा शहर में पहुंच सकता है।