शिमला। कांग्रेस हाईकमान के टिकट आवंटन को लेकर शिमला शहरी सीट पर विरोध की चिंगारी सुलग गई है। यहां से टिकट हरभजन सिंह भज्जी को दिए जाने और हरीश जनारथा का टिकट कटने पर जनारथा समर्थकों ने विरोध का बिगुल बजा दिया है। शुक्रवार को रिट्स में हरीश जनारथा सहित कांग्रेस के नाराज नेताओं, पूर्व मेयर, पार्षदों, कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने भाग लिया। नाराज कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हाईकमान को 22 अक्तूबर तक टिकट बदलकर हरीश जनारथा को पार्टी उम्मीदवार घोषित करने का अल्टीमेटम दिया। ऐसा न किए जाने पर तमाम मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा देने की धमकी दे डाली। उधर, कुसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने बगावत कर दी। यहां पिछले विधानसभा चुनाव से भाजपा की टिकट से लड़े प्रेम सिंह ठाकुर ने आजाद उम्मीदवार लड़ने की घोषणा की है। वह 23 अक्तूबर को नामांकन भरेंगे।
जनारथा ने कहा कि हाईकमान जनभावनाओें और उनके कार्यों को देखते हुए शिमला शहरी के टिकट आवंटन पर पुनर्विचार करे। पूर्व मेयर जैनी प्रेम, सोहन लाल, मनोज कुमार, पूर्व पार्षद वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोहन लाल, पूर्व डिप्टी मेयर शशि शेखर चीनू, पूर्व पार्षद अशोक सूद, ओम सूद, राजेंद्र जिंदा, सुशांत कपरेट, व्यापार मंडल के अध्यक्ष व नगर निगम पार्षद इंद्रजीत के साथ सोनिया चौहान, देवेंद्र चौहान, अतुल गौतम ,नरेश गांधी, मुफ्ती मोहम्मद शफी काजमी, पारचिनार सभा के प्रधान परमजीत सिंह, गुरुद्वारा साहिब संजौली कमेटी के उपाध्यक्ष रविंद्र सिंह बंगा, अधिवक्ता चंद्र मोहन के साथ मौजूद कांग्रेस नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि हरीश जनारथा हमेशा जनता के बीच में रहे हैं, जनता के लिए काम करते रहे हैं। हाईकमान ने उनको टिकट न देकर न देकर जनभावनाओं को नजरअंदाज किया है। ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया है, जो जनता के बीच नहीं रहे। वक्ताओं ने चेताया कि यदि शिमला सीट को जिताना है, तो पार्टी को टिकट को बदलना ही होगा।
इन नेताओं ने हरीश जनारथा का खुलकर समर्थन करने का एलान भी कर दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने हरीश जनारथा के समर्थन में खुलकर नारेबाजी भी की और पार्टी को चेताया कि 1998 में भी एक सीट के कारण सरकार नहीं बन पाई थी, इसलिए टिकट आवंटन की इस चूक को 22 अक्तूबर को सही कर आम जनता के बीच रहने वाले उम्मीदवार को पार्टी टिकट दिया जाए।
अपनी और आपकी इज्जत के लिए लड़ूंगा : जनारथा
समर्थकों की भीड़ के बीच भावुक हुए हरीश जनारथा ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। कहा कि हाईकमान मुझे इस तरह दूध से मक्खी की तरह निकाल देगी, यह सोचा नहीं था। समर्थकों से कहा कि आपका अहसान कभी नहीं भूलूंगा। 22 अक्तूबर तक पार्टी हाईकमान के फैसले का इंतजार करूंगा, फै सला न बदला तो जो आप लोग बोलेंगे वह करूंगा। हाई कमान में मेरी इज्जत नहीं रखी, अब अपनी और आपकी इज्जत के लिए लडूंगा।