शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने सिरमौर के जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक सहित उपमंडलाधिकारी नाहन और अन्य संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे नगर परिषद नाहन में पाए गए अवैध निर्माणों को हटाने में सहयोग करें। न्यायालय ने 30 सितंबर से पहले नाहन के सभी अवैध और गैरकानूनी निर्माण हटाने के आदेश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने अनिल अग्रवाल की दायर याचिका की सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किए। सुनवाई के दौरान कोर्ट के पिछले आदेशों की अवमानना करने पर सरकारी अधिकारियों ने अपना माफीनामा दायर किया।
गौरतलब है कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद भी नगर परिषद नाहन की परिधि में अवैध निर्माण और अतिक्रमणों को हटाने में नाकाम रहने पर हाईकोर्ट ने नगर परिषद नाहन के सभी सदस्यों के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था। सभी सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि अदालती आदेशों की अवहेलना करने पर उनके खिलाफ क्यों न अवमानना की कार्यवाही अमल में लाई जाए? साथ ही नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न इस परिषद को नगर परिषद अधिनियम के अनुसार भंग किया जाए।
अनिल अग्रवाल की दायर याचिका की सुनवाई के पश्चात डीसी सिरमौर और एसडीएम नाहन को भी अवमानना नोटिस जारी किया था। नगर परिषद नाहन ने शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताया था कि नगर परिषद की आम सभा का आयोजन 10 जनवरी को किया गया था। इसमें अतिक्रमण और अवैध निर्माण करने वालों को 15 दिन का कारण बताओ नोटिस का प्रस्ताव पारित किया गया। पिछली सुनवाई के दौरान नगर परिषद नाहन ने 244 लोगों की सूची भी हाईकोर्ट के समक्ष रखी थी, जिनकी बिजली काटने के आदेश जारी किए जा रहे थे।
कोर्ट ने मामले पर पिछली सुनवाई के दौरान पाया था कि नगर परिषद नाहन अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने में कोई रुचि नहीं दिखा रही है। कोर्ट ने प्रधान सचिव शहरी को आदेश दिए थे कि वह व्यक्तिगत रूप से नगर परिषद नाहन के कार्यों पर नजर बनाए रखें। कोर्ट ने प्रधान सचिव शहरी को नगर परिषद की परिधि में पिछले 10 वर्षों में हुए अतिक्रमण और अवैध निर्माण को हटाने बाबत उठाए गए कदमों की सूची शपथ पत्र के माध्यम से न्यायालय के समक्ष दायर करने को कहा था।