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18 वें रोजे को नाजिल फरमाई जबूर
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रामपुर। अल्लाह ने रोजे ही अता नहीं फरमाए, बल्कि तौहीद और हिदायत का भी पूरा सामान मुहैया कराया है। 18 रमजानुल मुबारक को हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम पर जबूर नाजिल फरमाई। इसलिए हम माहे रमजान की अहमियत को समझें।
इस्लामिक कलेंडर के नवें महीने रमजान को मुकद्दस माह कहकर पुकारा जाता है। अल्लाह ने कुरान भी इसी महीने में नाजिल फरमाया। हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के सहीफे भी इस महीने की 3 तारीख को उतारे गए। जबकि, 18 रनजानुल मुबारक को जबूर को हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम पर नाजिल फरमाया। जबूर में 130 सूरते हैं। सब सूरतों में दुआ, अल्लाह की तारीफ और हम्द है। अल्लाह को यह महीना कितना पसंद होगा कि बड़े-बड़े काम इसी महीने में किए। इसलिए हमें भी इस महीने की अहमियत को समझना चाहिए। कसरत से अल्लाह की इबादत करें। यह महीना पाक और बरकत है। मौैलाना नाजिल रजा कहते हैं कि हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम ने फरमाया है कि रमजान सब्र का महीना है।
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रोजा रखने में कुछ तकलीफ हो तो इसे बर्दाश्त करें। मौलाना कहते हैं : रसूल फरमाते हैं कि यह गम बांटने का महीना है। यानी गरीब के साथ अच्छा सुलूक करो। अगर 10 चीजें आपके रोजा इफ्तार के लिए हैं तो इनमें कुछ चीजें गरीबों को भी दो। सहरी और खाने में भी गरीबों का ख्याल रखें। अगर आपका पड़ोसी गरीब है तो उसका खासतौर से ख्याल रखें। कहीं ऐसा न हो कि हम तो पेट भर खा रहे हैं और पड़ोसी थोड़ा खाकर सो रहा है।
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