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कोल डैम जलाशय में लगेगा 15 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट, एनटीपीसी खर्च करेगा 60 करोड़

Thu, 26 Sep 2019 11:29 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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घर की छतों और जमीन पर सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पादन के बाद अब हिमाचल में एक नया प्रयोग होने जा रहा है। योजना सिरे चढ़ी तो जल्द बिलासपुर स्थित कोल डैम जलाशय में 15 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट देखने को मिलेगा।

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एनटीपीसी ने पानी पर तैरते हुए सोलर प्लांट लगाकर बिजली पैदा करने की योजना बनाई है। इस पर 60 करोड़ खर्च होंगे। फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगने से सतलुज नदी की खूबसूरती और निखरने का दावा किया जा रहा है।

बुधवार को शिमला में पावर कॉनक्लेव में सेली और म्याड़ बिजली परियोजनाओं के लिए एमओयू करने आए एनटीपीसी के निदेशक कामर्शियल आनंद कुमार गुप्ता ने यह खुलाया किया। उन्होंने बताया कि थर्मल एनर्जी पर काम करने वाले एनटीपीसी ने हाइड्रो एनर्जी का उत्पादन के लिए हिमाचल से शुरूआत की थी।
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कोल डैम को एनटीपीसी ने तैयार किया है। अब प्रदेश में एक नया प्रयोग किया जाएगा। जल्द एनटीपीसी देश में पांच हजार मेगावाट के अन्य प्रोजेक्ट भी शुरू करने जा रहा है।

पार्वती प्रोजेक्ट 2021 में शुरू करेगा बिजली उत्पादन

एनटीपीसी के अधिकारियों  ने बताया कि पानी के बीचोंबीच होने के कारण जमीन पर लगने वाले प्लांट की तुलना में इसके पैनल पर कम धूल भी जमेगी। इससे बिजली निर्माण में कोई रुकावट नहीं आएगी। बांध में पानी के घटते बढ़ते स्तर के बावजूद यह खुद अपनी जगह बनाकर बिजली का निर्माण करता रहेगा। पैनल सतह के ऊपर तैरते रहेंगे। पैनल को निकटवर्ती पावर ग्रिड के साथ जोड़ा जाएगा। 

एनएचपीसी के सीएमडी बलराज जोशी ने बताया कि जिला कुल्लू में स्थित पार्वती परियोजना में साल 2021 में उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट में 800 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। पैरा सियुल बिजली परियोजना में भी 290 करोड़ का अतिरिक्त खर्च कर इसे सुदृढ़ किया जाएगा। कहा कि वह शिमला के संजौली के रहने वाले हैं। ऐसे में हिमाचल से खास लगाव है। डुग्गर परियोजना को तय समय में शुरू किया जाएगा।
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2040 तक 25 हजार मेगावाट उत्पादन करेगा एसजेवीएनएल

एसजेवीएनएल ने साल 2040 तक के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है। निगम के सीएमडी नंदलाल शर्मा ने बताया कि साल 2040 तक 25 हजार मेगावाट उत्पादन किया जाएगा। यह लक्ष्य पूरा करने को 2023 तक पांच हजार मेगावाट, 2030 तक 12 हजार मेगावाट का लक्ष्य है।

वर्तमान में दो हजार मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से नदी के एक बेसिन पर एक ही कंपनी को बिजली परियोजनाएं स्थापित करने का सुझाव दिया। कहा कि छोटे-छोटे प्रोजेक्ट देने की जगह एक कंपनी को बड़ा प्रोजेक्ट देना चाहिए।
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