एनटीपीसी के अधिकारियों ने बताया कि पानी के बीचोंबीच होने के कारण जमीन पर लगने वाले प्लांट की तुलना में इसके पैनल पर कम धूल भी जमेगी। इससे बिजली निर्माण में कोई रुकावट नहीं आएगी। बांध में पानी के घटते बढ़ते स्तर के बावजूद यह खुद अपनी जगह बनाकर बिजली का निर्माण करता रहेगा। पैनल सतह के ऊपर तैरते रहेंगे। पैनल को निकटवर्ती पावर ग्रिड के साथ जोड़ा जाएगा।
एनएचपीसी के सीएमडी बलराज जोशी ने बताया कि जिला कुल्लू में स्थित पार्वती परियोजना में साल 2021 में उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट में 800 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। पैरा सियुल बिजली परियोजना में भी 290 करोड़ का अतिरिक्त खर्च कर इसे सुदृढ़ किया जाएगा। कहा कि वह शिमला के संजौली के रहने वाले हैं। ऐसे में हिमाचल से खास लगाव है। डुग्गर परियोजना को तय समय में शुरू किया जाएगा।
एसजेवीएनएल ने साल 2040 तक के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है। निगम के सीएमडी नंदलाल शर्मा ने बताया कि साल 2040 तक 25 हजार मेगावाट उत्पादन किया जाएगा। यह लक्ष्य पूरा करने को 2023 तक पांच हजार मेगावाट, 2030 तक 12 हजार मेगावाट का लक्ष्य है।
वर्तमान में दो हजार मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से नदी के एक बेसिन पर एक ही कंपनी को बिजली परियोजनाएं स्थापित करने का सुझाव दिया। कहा कि छोटे-छोटे प्रोजेक्ट देने की जगह एक कंपनी को बड़ा प्रोजेक्ट देना चाहिए।