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Shimla News: लाइसेंस फीस न चुकाने पर 15 शराब ठेकेदार डिफाल्टर घोषित

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एक्सक्लूसिव खबर
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आबकारी विभाग से ठेकेदारों से वसूलने से हैं 20.82 करोड़ रुपये, अंतिम नोटिस के बावजूद जमा नहीं की राशि
ठेकेदारों को लाइसेंस फीस ब्याज सहित चुकानी होगी

दीपक मेहता
शिमला। जिले में शराब ठेके लेकर लाइसेंस फीस नहीं भरने वाले 15 ठेकेदारों को कर एवं आबकारी विभाग ने डिफाल्टर घोषित कर दिया है। इन शराब ठेकेदारों पर लाइसेंस फीस सहित ब्याज के रूप में 20.82 करोड़ की राशि बकाया है।
ठेकेदार नोटिस जारी करने के बाद भी लाइसेंस फीस की राशि नहीं दे रहे। कुछ ऐसे ठेकेदार ऐसे हैं जिनके नाम कोई संपत्ति नहीं है। हालांकि अब उनके गारंटर रहे लोगों को वसूली राशि जमा करवाने के लिए नोटिस जारी किए हैं। इसके बाद लाइसेंस फीस जमा नहीं करवाने पर ठेकेदारों की प्रॉपर्टी अटैच कर कुर्क की जाएगी। कर एवं आबकारी विभाग ने बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले के 34 यूनिटों के शराब ठेकों का रिजर्व प्राइस 252 करोड़ रुपये निर्धारित किया था। नीलामी प्रकिया में ठेकेदारों ने इन यूनिटों के 256 शराब ठेकों को 251.82 करोड़ रुपये में खरीदा था।
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आबकारी नीति के अनुसार ठेकेदार/फर्म को एक साल के लिए शराब ठेका दिया था। इस दौरान प्रति महीने लाइसेंस फीस भरनी होती है। ऐसे में 15 ठेकेदार साल पूरा होने के बाद भी शराब की बिक्री के लिए विभाग के साथ किए अनुबंध की शर्तों को पूरा नहीं कर सके हैं। इनमें एक ठेकेदार से अधिकतम 4 करोड़ 16 लाख और कम से कम 28 लाख 54 हजार की राशि वसूली जानी है। विभाग इन ठेकेदारों को लाइसेंस फीस जमा करवाने को लेकर करीब पांच बार नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन ठेकेदार शराब फीस चुकाने में विफल रहे हैं। इसके बाद अब ठेकेदारों को डिफाल्टर घोषित किया है। साथ ही ठेकेदारों की एफडीआर, सुरक्षा राशि सहित प्रॉपर्टी को अटैच करने से पहले अंतिम नोटिस जारी किए हैं। कर एवं आबकारी विभाग के उप आयुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि डिफाल्टर घोषित किए ठेकेदारों ने नोटिस के बावजूद लाइसेंस फीस जमा नहीं करवाई तो उनकी जमीन को बेचकर या फिर प्रॉपर्टी को अटैच कर रिकवरी शुरू की जाएगी।
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यह है प्रॉपर्टी को अटैच करने का नियम
किसी भी फर्म को एक साल के लिए शराब ठेका दिया जाता है। इस दौरान उसे प्रति महीने लाइसेंस फीस भरनी होती है। यदि कोई ठेकेदार समय पर फीस नहीं भरता है तो लंबित राशि पर ब्याज लगना शुरू हो जाता है। साल पूरा होने पर भी फीस नहीं भरने पर पेनल्टी लगाई जाती है। इसके बाद विभाग उनकी चल-अचल संपत्ति अटैच कर लेता है और बाद में उसे नीलाम कर वसूली की जाती है।
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