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राजधानी के पानी से बीमार नहीं होंगे लोग

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अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। प्रदेश में पहली बार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में एसबीआर टेक्नालॉजी से पानी ट्रीट किया जाएगा। शिमला के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों को सिक्वेंशियल बैच रियेक्टर से अपग्रेड करने की मंजूरी मिल गई है। वीरवार को जलभवन में टेक्निकल कमेटी की बैठक में ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एंड सीवरेज सर्कल के प्रस्ताव को पास कर दिया गया।
शिमला के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अपग्रेड होने के बाद शहर में पीलिया और जल जनित रोग फैलने का खतरा नहीं रहेगा। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में एसबीआर टेक्नालॉजी लगने के बाद पानी का बैच वाइज ट्रीटमेंट होगा। एक नियंत्रित मात्रा में पानी ट्रीटमेंट के लिए पहुंचेगा। ट्रीटमेंट होने के बाद पानी को आगे बहा दिया जाएगा। इसके बाद एसबीआर टेक्नालॉजी के जरिये पूर्व निर्धारित मात्रा में दोबारा पानी का ट्रीटमेंट होगा।
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बैच वाइज ट्रीटमेंट से दूषित पानी के ट्रीटमेंट प्लांट से बाहर निकलने की संभावनाएं न के बराबर रह जाएंगी। मौजूदा समय में जितना भी पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में पहुंचता है, वह साथ साथ ही ट्रीटमेंट के बाद बाहर भी निकलता रहता है। ऐसे में दूषित पानी के ट्रीटमेंट प्लांट से बाहर निकलने का खतरा रहता है। मल्याणा और ढली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को एसबीआर टेक्नालॉजी से अपग्रेड करने के लिए निगम प्रशासन ने 16.29 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है।
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पहली बार प्रयोग होगी एसबीआर टेक्नालॉजी
एसबीआर टेक्नालॉजी से पहली बार शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में पानी ट्रीट किया जाएगा। इसे लेकर टेक्निकल कमेटी की ओर से भी स्वीकृति मिल गई है।
- धर्मेंद्र गिल, अधिशासी अभियंता, ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एंड सीवरेज सर्कल
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