प्रदेश के लोगों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने राजस्व विभाग को आधुनिक व मजबूत बनाने के कई प्रयास किए हैं। लोगों को सुविधा तथा बेहतर प्रशासन प्रदान करने के उद्देश्य से एसडीएम सिविल के नौ कार्यालय, 14 तहसील कार्यालय तथा 29 उप तहसील कार्यालय खोले हैं। सरकारी भूमि को पट्टे पर देने के लिए पट्टा नियम 2013 और पट्टा (संशोधित) नियम 2016 बनाए गए तथा इस प्रक्रिया का सरलीकरण करने के साथ.साथ पट्टे पर भूमि देने की दरों में भी बदलाव किए गए हैं।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में 21,392 राजस्व गांव हैं और बंदोबस्त संचालन को छोड़ बाकी सभी गांवों में अभिलेख का अधिकार (रिकॉर्ड ऑफ राईट) के डाटा एंट्री का कार्य पूर्ण कर लिया है और आम जनता के लिए यह डाटा आनलाइन उपलब्ध करवाया गया है। सरकार ने जनता को डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त आरओआर की प्रतियां जारी करने के लिए लोकमित्र केन्द्रों को अधिकृत किया है।
इन प्रतियों को सरकार ने कानूनी वैद्यता प्रदान की है और राजस्व विभाग ने इस जानकारी को वेब आधारित सर्वर पर उपलब्ध करवाने के लक्ष्य को पूरा किया है। वहीं, शिमला में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में राज्य डाटा सेंटर केन्द्र स्थापित किया गया है और राज्य डाटा केन्द्र के सर्वर पर कंप्यूटरीकृत डाटा उपलब्ध करवाया गया है।
डाटा तहसील आधारित ग्राहक सर्वर से राज्य डाटा सेंटर के वेब आधारित सर्वर पर स्थानांतरित करने के साथ ही सभी उप रजिस्ट्रार कार्यालयों में पंजीकरण की प्रक्रिया का कंप्यूटरीकरण कर पंजीकरण का कार्य आरओआर से जोड़ा गया है। प्रवक्ता ने बताया कि ई डिस्ट्रिकट प्रोजेक्ट के अंतर्गत विभाग 14 प्रकार के प्रमाण.पत्रों को ऑनलाइन जारी कर रहा है।
राज्य सरकार ने समाज के कमज़ोर वर्गों के आवासों के निर्माण के लिए ग्रामीण क्षेत्र में तीन बिस्वा और शहरी क्षेत्रों में दो बिस्वा भूमि का आवंटन निर्धारित किया गया है। साथ ही ई स्टांपिंग प्रणाली पूरे राज्य में यह प्रणाली प्रचलन में है। प्रदेश में महिलाओं के पक्ष में स्टैंप कर को घटाकर चार प्रतिशत किया गया है। मोर्टगेज डीड में स्वयं सहायता समूहों के लिए स्टांप शुल्क को घटाकर 10 रुपये किया गया है। प्रदेश में न्यूनतम छह पटवार सर्कलों पर एक कानूनगो सर्कल होगा।