ऐतिहासिक रिज मैदान में राज्य संग्रहालय, भाषा एवं संस्कृति विभाग के सौजन्य से चित्रकला महोत्सव के दूसरे दिन चित्रकारों ने कोरे कागज पर अपनी भावनाओं को रंगों से भरकर कई सामाजिक संदेश दिए। शिमला शहर की बिगड़ती सूरत की पीड़ा भी चित्रकारों ने चित्रों के माध्यम से व्यक्त की है। चित्रकारों ने भारत की संस्कृति, मानव के झूठे मुखौटे और शिमला को सुंदर रखने का आह्वान अपने चित्रों के माध्यम से किया।
फाइन आर्ट्स कॉलेज के छात्र ईश्वर ने उंगलियों के जरिये आदमी के सपनों को चित्रकला में दिखाने का प्रयास किया है। ईश्वर ने अपनी चित्रकला में आदमी के पैदा होने से मरण तक का सफर और आदमी के सपनों को अपने पेंटिंग में दिखाया है। ईश्वर चंद ने बताया कि इनसान हमेशा अपने सपनों में जीता है और अपने जीवन के लक्ष्य को कल के लिए छोड़ देता है।
चित्रकला से लोगों को बताया जा रहा है कि अपने सपने को पूरा करने के लिए कार्य करते चलें नहीं तो जैसे जन्में थे वैसे ही मिट्टी में मिल जाएंगे। गुजरात से 53 वर्षीय कनू पटेल अपनी चित्रकला से यह दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि लोग किस तरह झूठा सच्चाई का मुखौटा ओढ़ लेते हैं। कनू पटेल ने बताया कि लोग अपनी सच्चाई को छुपा के रखते हैं और दिखावे की सुंदर सी जिंदगी जीते हैं। मनु पटेल ने अपनी चित्रकला में एक सुंदर सा चेहरा चित्रित किया है।
शिमला बन गया इमारतों का जंगल
फाइन आर्ट्स कॉलेज के छात्र आदित्य ने अपनी पेंटिंग में शिमला शहर में बढ़ रहे कंक्रीट के पहाड़ को दिखाया है। आदित्य ने शिमला में इमारतों की भीड़ को बनाकर लोगों को शिमला को स्वच्छ और सुंदर रखने का संदेश दिया है। न्यू शिमला के नितिन ने जाखू मंदिर और हनुमान की प्रतिमा को पेंटिंग में दिखाकर हिमाचल को सुंदर रखने का संदेश दिया है।
आस्था की पेंटिंग में आभूषणों की झनकार
हरियाणा की आस्था ने अपनी चित्रकला से भारतीय महिलाओं के आभूषणों को दिखाया। इसमें बताया कि हमारे पुराने कारीगर बिना किसी मशीनरी के भी कितने कुशल थे। आस्था ने बताया कि आज की युवतियां अपनी संस्कृति और पारंपरिक आभूषणों को भूलती जा रही हैं। आभूषण ही महिला की सुंदरता का सबसे मुख्य शृंगार है। वहीं पेंटिंग से संदेश दे रही है कि अपनी संस्कृति को सहेज कर रखें।