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आईजीएमसी के निशुल्क जन औषधि केंद्र में न तो गेसटिक और न ही पेनकिलर की दवा

Fri, 28 Jun 2019 11:55 AM IST
शिमला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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फाइल फोटो
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आईजीएमसी निशुल्क जन औषधि केंद्र पर गैस्टिक और पेनकिलर जैसी आम दवाएं भी नहीं मिल रहीं। अस्पताल की ओपीडी में उपचार के बाद गरीब मरीज यह दवाएं निजी दुकानों से महंगी दरों पर खरीदने को मजबूर हैं। अस्पताल की मेडिसन, ईएनटी, कार्डियोलाजी ओपीडी में उपचार करवाने आए मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है। प्रशासन के मरीजों को सभी तरह की आवश्यक दवाएं मुहैया करवाने के दावों की भी यहां पोल खुल रही है।

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अस्पताल में रोजाना औसतन 4 हजार के करीब ओपीडी हो रही है। ऐसे में सरकार ने प्रशासन को निशुल्क जन औषधि केंद्र खोलने को कहा था। दावा था कि इस केंद्र पर सभी मरीजों को दवाएं मुफ्त दी जाए। लेकिन वीरवार को ओपीडी में उपचार के बाद दवा लेने आए सैकड़ों मरीज मुफ्त दवा लिए ही लौट आए। जुब्बल की सावित्री ने बताया कि गाड़ी के दरवाजे में हाथ आ गया।

डॉक्टरों ने पेनकिलर लिखी लेकिन दवा नहीं मिल पाई। मंडी की नारदा चंदेल ने कहा कि मां को दिखाने कॉर्डियोलाजी ओपीडी में आई थी। डॉक्टर ने जब गैस्टिक की दवा लिखी तो नहीं मिल पाई। महिला ने बताया कि मुफ्त दवा के नाम पर प्रशासन महज मरीजों को गुमराह कर रहा है। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज ने बताया कि अस्पताल में आवश्यक दवाओं की लिस्ट का पूरा स्टॉक उपलब्ध हैं।
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यह दवाएं नहीं है अस्पताल में
पेंट्राप्रेजोल, पेनकिलर, मायो फ्री, जीरोडोल पी, कैलशियम और आंखों की कई दवाएं मुफ्त जन औषधि केंद्र में नहीं मिल रही है। हालांकि कई दवाओं के लिए प्रबंधन तर्क देता है कि यह आवश्यक दवाओं में नहीं आती। लेकिन सवाल यह है कि जो आवश्यक दवाएं हैं वह भी निशुल्क जनऔषधि केंद्र पर उपलब्ध नहीं होती।

आर्थो की कई दवाएं लिस्ट में नहीं
प्रबंधन की ड्रग लिस्ट में आर्थो विभाग की अधिकांश दवाएं शामिल नहीं हैं। फिर भी पर्ची पर दवाएं लिखने के बाद केंद्र पर भेजा जाता है। दवाएं नहीं मिलती हैं तो मरीजों को निजी दुकानों में जाकर दवाइयां खरीदना पड़ती हैं। तो ऐसे में मरीजों को सभी तरह की दवाएं देने को लेकर दावे क्यों किए जाते है? इस तरह के कई सवाल मरीजों के मन में उठ रहे है।

530 किलोमीटर के बाद पहुंचा हूं शिमला
चंबा के खेमराज ने बताया कि साहब 530 किलोमीटर का सफर और 1610 रुपये किराया खर्च करके पत्नी का इलाज करवाने आईजीएमसी आया। अब डॉक्टरों ने दवाएं लिखी तो वह निशुल्क दवा केंद्र पर नहीं मिली। जेब से 630 रुपये खर्चकर यह दवा ली है। बताया कि इतनी दूर से आने के बाद भी ऐसा हो तो चंबा में ही निजी अस्पतालों में दिखाकर उपचार करवाना सही है। आखिर क्यों सस्ती दवा के चक्कर में इतना पैसा बर्बाद किया जाए।

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