अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सरकारी गाड़ी के दुरुपयोग मामले में फंसे नगर निगम के पूर्व उप महापौर टिकेंद्र सिंह पंवर को जल्द ही इस मामले में क्लीन चिट मिल सकती है। पंवर के खिलाफ पुख्ता सबूत न मिलने के बाद निगम ने जांच लगभग बंद कर दी है।
निगम प्रशासन ने इस मामले की जांच का जिम्मा अकाउंट ब्रांच को सौंपा था लेकिन करीब दो साल बाद भी पूर्व डिप्टी मेयर के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिल सका है। रिकॉर्ड देखने के बाद यह तो सामने आ रहा है कि पूर्व डिप्टी मेयर ने सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल किया। लेकिन गाड़ी का इस्तेमाल निजी काम के लिए किया गया, इसके कोई प्रमाण नहीं हैं। ऐसे में यह साबित करना मुश्किल हो रहा है कि पूर्व डिप्टी मेयर ने गाड़ी का दुरुपयोग किया। हालांकि, निगम प्रशासन अभी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले छह माह से इसकी जांच की फाइल अकाउंट ब्रांच में धूल फांक रही है। निगम आयुक्त रोहित जमवाल ने बताया कि मामले से जुड़ी ऐसी कोई फाइल अभी उन्हें नहीं मिली है।
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पूर्व मंत्री ने दिए थे जांच के आदेश
पूर्व डिप्टी मेयर के खिलाफ आरटीआई के आधार पर एक लिखित शिकायत मिलने के बाद पूर्व शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने जांच के आदेश दिए थे। पहले शहरी विकास विभाग को ही जांच का जिम्मा सौंपा गया था। लेकिन क्योंकि मामला निगम से जुड़ा था तो फाइल नगर निगम पहुंच गई। यहां अकाउंट ब्रांच ने रिकॉर्ड चैक किया तो उसमें ऐसा कहीं नहीं पाया गया कि गाड़ी का इस्तेमाल निजी कार्यों के लिए किया गया है।
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सरकारी गाड़ी के लिए अधिकृत नहीं हैं डिप्टी मेयर
नगर निगम में सिर्फ महापौर को ही सरकारी गाड़ी की सुविधा मिलती है। डिप्टी मेयर सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं कर सकते। लेकिन डिप्टी मेयर आयुक्त या मेयर से कहकर गाड़ी का इस्तेमाल कर सकता है। यह इस्तेमाल निगम के कार्यों के लिए ही किया जा सकता है।