कम्यूनिटी मेडिसन विभाग के निजी और सरकारी स्कूलों के बच्चों पर किए सर्वे में खुलासा
क्रॉसर
8.2 फीसदी बच्चे पीते हैं बीयर, 7.1 फीसदी सिगरेट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला में 18 साल से कम उम्र के 12.1 फीसदी स्कूली छात्र नशा करने लगे हैं। यह वह छात्र हैं जो निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। शनिवार को मनाए गए अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर आईजीएमसी के कम्यूनिटी मेडिसन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तृप्ति चौहान ने यह जानकारी दी।
विभाग की डॉ. तृप्ति चौहान ने बताया कि यह सर्वे बीते वर्ष 720 बच्चों पर किया गया था। इनमें 8.2 फीसदी बच्चे बीयर और 7.1 फीसदी सिगरेट तथा 3 से 4 फीसदी बच्चे बीड़ी पीते हैं। इसके अलावा कुछ बच्चे शराब का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। तीन फीसदी चिट्टा और अन्य नशा करते हैं। इस नशे का कम करने का मुख्य कारण महंगा व आसानी से न मिल पाना था। डॉक्टर का कहना है कि कम उम्र में बच्चों का नशे की ओर बढ़ने का मुख्य कारण दोस्त की बातों में आना और माता-पिता का बच्चों पर अधिक ध्यान न देना है।
बच्चों को अकेलापन न होने दें महसूस : डॉ. चौहान
कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग की डॉ. तृप्ती चौहान ने कहा कि आज के दौर में अभिभावक जॉब की वजह से बच्चों पर अधिक ध्यान नहीं दे पा रहे। किसी वजह से जिस परिवार में माता-पिता अलग रह रहे हैं तो इन परिवारों के बच्चे भी गलत संगत में पड़कर नशे के आदी हो जाते हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। स्कूलों में शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाई के अलावा नैतिक मूल्य का पाठ भी पढ़ाना चाहिए। बच्चों को व्यायाम और खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चा अगर अकेलापन ढूंढ रहा है तो उस पर नजर रखें। हो सकता है आपका बच्चा नशे की तरफ बढ़ रहा हो या फिर किसी अन्य गलत कार्यों में रुचि रखने लगा हो।