शहर के तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के सैंपल फेल होने और पेयजल में इनका गंदा पानी मिलने के मामले में नगर निगम के ग्रेटर शिमला वाटर एंड सीवरेज सर्किल के कई अधिकारी नप सकते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के बाद कई अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जा सकते हैं। हाल ही में बोर्ड ने आईपीएच और ग्रेटर शिमला वाटर सर्किल को इसके बारे में नोटिस थमाया था। सर्किल ने इसका जवाब अब सौंप दिया है। नोटिस में इनसे पूछा गया था कि आखिर इस लापरवाही के पीछे क्या कारण रहा?
कैसे तीन एसटीपी के सैंपल पास होते गए जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में इनके सैंपल फेल पाए गए। सैंपल फेल होने के कारण गंदा पानी पेयजल में मिलता रहा। एसटीपी की अपग्रेडेशन को लेकर आखिर समय पर कदम क्यों नहीं उठाए गए?
उधर, सर्किल की ओर से इसका जवाब तो सौंप दिया गया है लेकिन अब इसे चेक करने और रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो सर्किल के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होना तय है।
ग्रेटर शिमला वाटर सर्किल ने नोटिस के जवाब में कहा कि सैंपल लेने में कई बार अंतर आ जाता है। इसीलिए शायद जो सैंपल सर्किल की लैब में पास हुए, वे बाद में बोर्ड की जांच में फेल हो गए। इसके अलावा तीनों एसटीपी के अपग्रेडेशन का भी दावा किया गया है। इसके टेंडर कर लिए गए हैं जिनका काम जल्द शुरू करने की बात कही है।
नोटिस का जवाब सौंप दिया है। तीनों एसटीपी को अपग्रेड करने की योजना बन चुकी है जिसके टेंडर भी कर दिए गए हैं।
- धर्मेंद्र गिल, अधीक्षण अभियंता, ग्रेटर शिमला वाटर एंड सीवरेज सर्किल