रेलवे का 113 साल पुराना इतिहास ‘स्टीम लोकोमोटिव इंजन’ बुधवार को एक बार फिर शिमला-कैथलीघाट रेल ट्रैक पर दौड़ता नजर आया। स्टीम इंजन को शिमला ऐक्सटेंशन से कैथलीघाट तक 22 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर चलाया गया। इसमें अमेरिकी सैलानियों के एक समूह ने यात्रा का लुत्फ उठाया। जैसे ही ड्राइवर ने इंजन को स्टार्ट किया कि आवाज सुनकर स्थानीय लोग भी इसे देखने के लिए उमड़ पडे़।
पहले तो इन सैलानियों ने शिमला ऐक्सटेंशन पर स्टीम इंजन को कैमरे में कैद किया। इसके बाद शिमला की वादियों को भी यादों के रूप में अपने कैमरों में समेट लिया। इन सैलानियों को लेकर स्टीम इंजन 14-14 सीटों वाले वीवीआईपी कोच सी टी 12,13 के साथ शिमला से कैथलीघाट के बीच चलाया गया।
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्टीम इंजन के लिए यह विशेष कोच डिजाइन किए गए हैं। कोच में सोफे की सीटें लगाई गई हैं, जिससे हरी-भरी वादियों और देवदार के घने जंगलों के नजारे का आनंद सैलानी आरामदायक स्थिति में बैठ कर ले सकें। इंजन चलाने के लिए तीन कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। स्टीम इंजन के जरिये इन सैलानियों को शिमला से कैथलीघाट तक का सफर करवाया गया।