तीस हजार शिमलावासियों के हिस्से का पानी रोजाना शहर में पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाता है। पिछले दिनों जब शिमला शहर के लोग पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे थे तब भी रोज करीब 40 लाख लीटर पानी सड़कों और जंगलों में बहता रहा। शहर की दो सबसे बड़ी पेयजल परियोजनाओं गिरि और गुम्मा की मेन पाइपलाइन की जांच में यह खुलासा हुआ है।
हालांकि, अवैध कनेक्शनों और लीकेज पर क्या अंतिम रिपोर्ट तैयार की है, इसका खुलासा निगम प्रशासन नहीं कर रहा। निगम इस रिपोर्ट को सोमवार को कोर्ट में पेश करेगा। प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों पर मेनलाइन से अवैध कनेक्शनों का पता लगाने के लिए नगर निगम ने एक जांच कमेटी बनाई थी।
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान क्रेगनैनो से ढली तक की मेनलाइन में सड़कों और जंगलों में लीकेज के 30 से अधिक प्वाइंट मिले हैं। प्रोमीटर के जरिये की जांच में पाइपलाइन की लीकेज का पता चला है। लीकेज, अवैध कनेक्शन और पेयजल संकट के लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट निगम कोर्ट के समक्ष रख सकता है।
सड़कों के नीचे ज्यादा लीकेज, आयुक्त को सौंपी रिपोर्ट
दोनों परियोजनाओं में दो-दो एमएलडी पानी की लीकेज मिली है। ज्यादातर लीकेज सड़क के नीचे बिछाई पाइपलाइन में है। बताया जा रहा है कि भारी वाहनों की आवाजाही के चलते सड़क के नीचे पाइपलाइन में लगे ज्वाइंट लीकेज कर रहे हैं। इनका पानी सड़क पर आ रहा है।
पुरानी लाइन में हो रही इस लीकेज को दुरुस्त करने के लिए निगम ने प्लान बनने की भी तैयारी कर ली है। टीम ने एक रिपोर्ट तैयार कर आयुक्त को सौंप दी है। पेयजल मामले को लेकर सोमवार को प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। आयुक्त पंकज राय का कहना है कि रिपोर्ट मिल गई है, इसे कोर्ट में पेश करेंगे। रिपोर्ट में क्या है, इस बारे में अभी नहीं बता पाएंगे।
नई लाइन से खत्म होगी लीकेज
नगर निगम क्रेगनैनो से ढली तक नई पाइपलाइन भी बिछा रहा है। इससे पुरानी लाइन की लीकेज से राहत मिलेगी। इसके अलावा गिरि परियोजना के स्टेज वन में भी करीब 4500 मीटर लंबी पाइपलाइन बदली जा रही है। इसमें करीब एक हजार मीटर लाइन बदली भी जा चुकी है। दूसरे चरण के लिए सात करोड़ के टेंडर जारी किए हैं।