शहर में तहबाजारियों को बसाने की नगर निगम की योजना फाइलों तक ही सिमटकर रह गईं। तहबाजारी बेलगाम हो गए हैं। लोअर बाजार के बाद मालरोड और रिज तक अवैध दुकानें सजाई जा रही हैं।
शहर के तहबाजारियों को बसाने का भाजपा का दावा पहले साल पूरा नहीं हुआ। केंद्र से 2.77 करोड़ रुपये मिलने के बावजूद योजना ठंडे बस्ते में चली गई। पिछले साल सितंबर में निगम ने सर्वे करवाया और करीब छह सौ से अधिक पंजीकृत तहबाजारियों की रिपोर्ट तैयार की।
इन्हें केंद्र से मिले पैसों के तहत तहबाजारी लगाने के लिए जगह मिलनी थी। कई जगह शेड भी बनने थे। तहबाजारियों को पहचान पत्र देकर उन्हें बसाने की योजना थी लेकिन रिपोर्ट तैयार होने के बाद यह फाइलों में दब गई।
अब हालत यह है कि शहर में तहबाजारियों की संख्या एक हजार पार कर गई है। सड़कें तंग हो गई हैं। बाजारों में चलना तक मुश्किल हो रहा है।
फाइलों में सिमटकर रह गया बजट
भाजपा शासित नगर निगम का पहला बजट भी फाइलों में ही सिमटकर रह गया है। हालांकि, यह बजट इसी साल पेश किया गया लेकिन इसकी कई बड़ी घोषणाएं अभी फाइलों से बाहर नहीं निकली हैं।
महिलाओं को स्वरोजगार देने की मेयर की बड़ी घोषणा पर अभी काम शुरू नहीं हुआ। वार्डों में वाटर एटीएम नहीं लगे, मज्याठ और टुटू में सीवरेज लाइन तक नहीं बिछ पाई। वार्डों में सामुदायिक केंद्र बनाना, स्ट्रीट लाइटें, नए शौचालय बनाने जैसी योजनाएं लागू होना बाकी है।
ये काम जरूर हुए
ज्यादातर वार्डों में सड़कों की टारिंग लगभग पूरी कर ली गई है। कई वार्डों में रेलिंग और पक्के रास्ते भी बनाए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और सतलुज प्रोजेक्ट के लिए कंपनी का गठन कर लिया गया है।