शहर में कूड़े की फीस में लाखों रुपये का गोलमाल करने वाले सैहब सोसायटी के दस सुपरवाइजरों को बर्खास्त कर दिया गया है। निगम ने इनकी सेवाएं हमेशा के लिए खत्म कर दी हैं। इनके खिलाफ कूड़े की फीस में भारी गोलमाल करने के पुख्ता सबूत मिले थे।
नोटिस के बाद इन सुपरवाइजरों ने भी गड़बड़ी होने की बात कबूली थी। लेकिन इन्होंने निगम से एक और मौका देने की मांग की थी। उधर, निगम प्रशासन का कहना है कि लाखों की चपत लगाने वाले ऐसे कर्मचारियों को काम पर नहीं रखा जा सकता।
ऐसे में इन्हें बाहर किया जा रहा है। नगर निगम आयुक्त रोहित जमवाल का कहना है कि दस सुपरवाइजरों को बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं, तीन सहायक सुपरवाइजरों के खिलाफ जांच बिठा दी गई है। इनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
तीन सुपरवाइजरों की नौकरी बची- तीन ऐसे सुपरवाइजर भी हैं, जिन्हें बर्खास्त करने के ऑर्डर फिलहाल रोक दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार घपले में इनकी भी गड़बड़ी सामने आई थी।
लेकिन बाद में सोसायटी के तीन सहायक सुपरवाइजरों ने माना कि वे इन सुपरवाइजरों की जगह रसीदें काट रहे थे। गड़बड़ी करने में उनका हाथ है। ऐसे में निगम ने सुपरवाइजरों की जगह सहायक सुपरवाइजरों पर जांच बिठा दी है।
अमर उजाला ने किया था खुलासा- जनवरी में कूड़े की फीस में घपले का खुलासा सबसे पहले अमर उजाला ने किया था। दरअसल निगम को कूड़े की फीस में प्रतिमाह 28 लाख रुपये की आय होती थी। जनवरी में कूड़े के रेट डबल कर दिए गए।
इससे कमाई 40 लाख होनी थी लेकिन यह 28 से घटकर 22 पहुंच गई। 18 लाख रुपये का सुपरवाइजर हिसाब नहीं दे पाए। जांच में कई फर्जी रसीदें भी निगम के हाथ लगीं। कुल 13 सुपरवाइजरों की गलती पाई गई। इसके बाद निगम ने इन्हें बाहर निकालने का फैसला लिया।