प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी से इतने डॉक्टरों के चले जाने से विभागों समेत ओपीडी का काम भी प्रभावित होगा। ये डॉक्टर सालों से यहां सेवाएं दे रहे थे। नए मेडिकल कॉलेज चलाने के चक्कर में पुराने कॉलेज और अस्पताल का कार्य प्रभावित होने का अंदेशा है।
डॉक्टरों का कहना है कि सरकार को नए मेडिकल कॉलेज खोलने से पहले पुराने कॉलेजों में डॉक्टरों की स्थिति को भी देखना चाहिए। ऐसा न हो कि नए के चक्कर में पुराने कॉलेज एवं अस्पताल ही बंद हो जाएं।
सबसे ज्यादा प्रभावित होगा बाल रोग विभाग
डॉक्टरों को भेजने से आईजीएमसी के बाल रोग विभाग की ओपीडी का काम सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है। इस विभाग से दो डॉक्टरों को नाहन मेडिकल कॉलेज के लिए भेजा गया है। बालरोग ओपीडी में रोजाना दर्जनों मामले आते हैं। अब दो विशेषज्ञों के तबादले के बाद हालत खराब हो सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि पेराफेरी में डॉक्टरों को 2 साल सेवाएं देनी होती हैं। ऐसे में अगर यह अवधि एक साल कर दी जाए तो बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या काफी हद तक कम हो सकती है। कहा कि सरकार को पालिसी पर विचार करना चाहिए।
क्या कहता है कालेज प्रबंधन
आईजीएमसी के कालेज प्राचार्य प्रोफेसर अशोक शर्मा ने कहा कि 11 डाक्टर यहां से दूसरे मेडिकल कालेज में तब्दील किया गया है उन्होंने बताया कि इन सभी को यहां से रिलीव कर दिया गया है।