अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आईजीएमसी में एक बार फिर से सीटी स्कैन मशीन हांफ गई है। दो दिन से यह बंद पड़ी है। इलाज के लिए आए मरीजों को सीटी स्कैन करवाने के लिए निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। मरीज तो रेडियोलॉजी विभाग में आकर मशीन के दुरुस्त होने की सूचना ले रहे हैं, लेकिन ये अभी तक खराब है।
आईजीएमसी के रेडियोलॉजी विभाग में एक बार फिर से मशीन के खराब होने के कारण कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, अल्सर और आपातकालीन स्थिति में इमरजेंसी में आए मरीजों के सीटी स्कैन टेस्ट नहीं हो रहे हैं। सैकड़ों मरीज परेशान हो रहे है। टेस्ट न होने के कारण इन गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को बाहर अधिक दरों पर टेस्ट करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मशीन में आ रही खराबी को दुरुस्त नहीं करवाया जा रहा है। मंगलवार को भी अस्पताल में मशीन को दुरुस्त करने के लिए इंजीनियर पहुंचे लेकिन शाम तक मशीन को दुरुस्त नहीं कर पाए। अस्पताल में इस दौरान काउंटर भी बंद रहे। मरीज दिन भर परेशान होते रहे। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने बताया कि मशीन में खराबी आई है। इससे मरीजों के सीटी स्कैन नहीं हो रहे हैं।
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प्लेन सीटी स्कैन भी नहीं हो रहे
अस्पताल में स्टोन, सिर, र्स्वाइकल स्पाइन और जिन मरीजों की हड्डी टूटी है। इनके प्लेन सीटी स्कैन भी नहीं हो रहे हैं। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं।
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अब तो डेट भी नहीं मिल रही
अधिकांश मरीजों को मशीन बंद होने की जानकारी नहीं थी। जब मरीज टेस्ट करवाने के लिए पुराने भवन स्थित रेडियोलॉजी विभाग पहुंचे तो उन्हें न तो सीटी स्कैन की डेट दी गई और न ही यह बताया कि मशीन को दुरुस्त कब तक किया जाएगा। जिसके बाद मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। ऐसे ही केस दिन भर विभाग पहुंचते रहे।
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एक ही मशीन पर बोझ
अस्पताल में एक मशीन पर सालों से यह टेस्ट किए जा रहे है। विभाग में सुबह और शाम की शिफ्टों में औसतन 60 से 70 के करीब सीटी स्कैन हो जाते हैं। जबकि मशीन भी 24 घंटे सातों दिन यहां पर चलती है। ऐसे में बार बार आती मशीन में खराबी के बाद आखिर दूसरी मशीन क्यों नहीं खरीद लेता है, ताकि एक और मशीन के आने के बाद मशीन पर पढ़ने वाला बोझ भी काफी हद तक कम होगा।