हिमाचल के सेब बागवानों को इस साल करीब 1000 करोड़ रुपये की मोटी चपत लगी है। मौसम की बेरुखी के चलते इस सीजन में सेब उत्पादन में एक करोड़ पेटी की गिरावट दर्ज की गई है। सूबे में औसतन तीन करोड़ पेटियों का कारोबार होता है, लेकिन इस बार सेब की महज दो करोड़ पेटियों (कार्टन) की ही पैदावार हो पाई है।
किन्नौरी सेब की आखिरी खेप के मंडियों में बिकते ही प्रदेश में सेब सीजन खत्म हो गया है। बागवानी निदेशालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक राज्य में सेब के बगीचों में लगभग दो करोड़ पेटियों का ही उत्पादन हो पाया है। इनमें भी देश भर की मंडियों में महज एक करोड़ 81 लाख 32 हजार 639 सेब की पेटियां ही उतर पाई हैं।
18 लाख पेटियां घरेलू उपभोग में इस्तेमाल की गई हैं। वर्ष 2016 में दो करोड़ 10 लाख 999 सेब की पेटियां मंडियों में भेजी गईं। वर्ष 2015 में तीन करोड़ 49 लाख 70 हजार 662 पेटियों और 2014 में दो करोड़ 81 लाख 33 हजार 953 कार्टन का उत्पादन हुआ।
एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में सेब का करीब 3500 से 4000 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होता है। इस बार यह लगभग 3000 करोड़ रुपये के आसपास ही सिमट गया है।