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हिमाचल के सेब बागवानों को इस साल लगी 1000 करोड़ की चपत

Wed, 15 Nov 2017 11:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल के सेब बागवानों को इस साल करीब 1000 करोड़ रुपये की मोटी चपत लगी है। मौसम की बेरुखी के चलते इस सीजन में सेब उत्पादन में एक करोड़ पेटी की गिरावट दर्ज की गई है। सूबे में औसतन तीन करोड़ पेटियों का कारोबार होता है, लेकिन इस बार सेब की महज दो करोड़ पेटियों (कार्टन) की ही पैदावार हो पाई है।
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किन्नौरी सेब की आखिरी खेप के मंडियों में बिकते ही प्रदेश में सेब सीजन खत्म हो गया है। बागवानी निदेशालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक  राज्य में सेब के बगीचों में लगभग दो करोड़ पेटियों का ही उत्पादन हो पाया है। इनमें भी देश भर की मंडियों में महज एक करोड़ 81 लाख 32 हजार 639 सेब की पेटियां ही उतर पाई हैं।

18 लाख पेटियां घरेलू उपभोग में इस्तेमाल की गई हैं। वर्ष 2016 में दो करोड़ 10 लाख 999 सेब की पेटियां मंडियों में भेजी गईं। वर्ष 2015 में तीन करोड़ 49 लाख 70 हजार 662 पेटियों और 2014 में दो करोड़ 81 लाख 33 हजार 953 कार्टन का उत्पादन हुआ।
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एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में सेब का करीब 3500 से 4000 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होता है। इस बार यह लगभग 3000 करोड़ रुपये के आसपास ही सिमट गया है।
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खराब मौसम से कम हुई सेब पैदावार

बागवानी विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र ठाकुर का कहना है कि खराब मौसम के कारण ही इस साल हिमाचल में सेब सीजन प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में परागण के वक्त मौसम खराब रहा और ओलावृष्टि हुई। कई इलाकों में फूलों और फलों पर भी इसकी मार पड़ी। इससे सेब की पैदावार प्रभावित हुई। 

हमें नए रूट स्टॉक पौधों को अपनाना होगा
राज्य सरकार के प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा ने कहा कि कम पैदावार होने के पीछे जलवायु और पर्यावरण में आया बदलाव बड़ा कारण है। इस बार सेब के फलों की सेटिंग के दौरान मौसम सर्द-गर्म होता रहा, उससे भी समस्या हुई।

विभाग के पास प्रदेश में 80-90 साल पुरानी सेब की किस्में हैं। इनसे ज्यादा पैदावार नहीं ली जा सकती। अगर बागवानों को हर साल अच्छी फ सल लेनी है तो रूट स्टॉक आधारित सेब के पौधे लगाने ही होंगे।

इसी से सेब की अच्छी पैदावार ली जा सकेगी। इस साल दो करोड़ से भी कम सेब पेटियों के उत्पादन से सबक लेने की जरूरत है।
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