हिमाचल प्रदेश के पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान स्वास्थ्य संस्थान (एम्स) बिलासपुर के लिए आठ माह पहले एंट्रेंस टेस्ट पास कर चुकीं करीब 100 नर्सें तैनाती का इंतजार कर रही हैं। 8 सितंबर, 2020 को देश भर के 16 एम्स में नर्सों की तैनाती के लिए नोरसेट के नाम से एंट्रेंस टेस्ट हुआ था। इसमें बिलासुपर के लिए 100 नर्सों ने परीक्षा दी थी। इनका परिणाम 9 अक्तूबर, 2020 को घोषित किया गया था।
देश के अन्य एम्स में तो नर्सों की तैनाती हो गई, लेकिन बिलासपुर एम्स में तैनाती को अभी इंतजार करना पड़ रहा है। एंट्रेंस टेस्ट पास करने वाली अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी एम्स अथॉरिटी ने पूरी कर ली है। परीक्षा पास करने वाली अभ्यर्थियों की मानें तो ऑनलाइन और ऑफलाइन उनके दस्तावेज जांचे जा चुके हैं। छह अप्रैल को तत्कालीन एम्स निदेश डॉ. जगत राम ने इन अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पीजीआई चंडीगढ़ में किया था।
इनमें कुछ ऐसी नर्सें ऐसी भी हैं, जिन्होंने प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में एंट्रेंस टेस्ट पास कर लिया है। इन्हें प्रदेश सरकार की तरफ से ज्वाइनिंग के लिए कहा जा रहा है। एम्स में तैनाती में देरी होने के चलते यह तय नहीं कर पा रही हैं कि इन्हें प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देना शुरू कर देना चाहिए या अभी और इंतजार करना चाहिए। इनका कहना है कि देश के अन्य एम्स ने नर्सों की तैनाती कर दी है। इनमें ऐसे भी संस्थान हैं, जो पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
बठिंडा एम्स ने नर्सों की तैनाती कर दी है। तैनाती के बाद उनकी सेवाएं सिविल अस्पतालों में ली जा रही हैं। कहा कि जब तक बिलासपुर एम्स में ओपीडी शुरू नहीं होती, तक तब प्रदेश के अस्पतालों में नर्सों की तैनाती की जाए। बिलासपुर एम्स के निदेशक डॉ. वीर सिंह नेगी ने कहा कि उन्होंने हाल ही में बिलासपुर एम्स का कार्यभार संभाला है। आते ही उन्होंने प्रदेश के लोगों के लिए टेलीमेडिसीन सेवा शुरू की।संस्थान के सारे दस्तावेज कागजात ंडीगढ़ पीजीआई के पास हैं। इन्हें टेकओवर करने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता संस्थान में नर्सों की नियुक्ति होगी। नर्सिंग स्टाफ संस्थान का अहम हिस्सा है।