पासपोर्ट बनवाने के लिए प्रदेश भर के लोगों को अब राजधानी शिमला आना पड़ेगा। जिलों के पासपोर्ट सेंटर बंद कर दिए गए हैं। 13 नवंबर के बाद वहां पासपोर्ट का कोई आवेदन नहीं लिया जाएगा। शिमला स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से इस संबंध में सभी जिला उपायुक्तों को सूचित कर दिया गया है।
पासपोर्ट बनाने से लेकर इसे रिन्यू करने तक का सारा काम अब शिमला स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र में होगा। लोगों को बायो मीट्रिक सिस्टम से बनने वाले पासपोर्ट ही मिलेंगे। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी राजेश शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हर जगह अब बायो मीट्रिक सिद्धांत पर पासपोर्ट बन रहे हैं। ये सुरक्षा के लिहाज से सर्वमान्य है।
हिमाचल प्रदेश में दो तरह से पासपोर्ट बन रहे थे। एक जिलों से आने वाली एप्लीकेशन के आधार पर और दूसरे सीधे पासपोर्ट कार्यालय शिमला से। जिलों से आने वाली एप्लीकेशन के आधार पर बनने वाले पासपोर्ट साधारण होते थे जबकि शिमला में बायो मीट्रिक सिस्टम से बन रहे थे। पासपोर्ट में एकरूपता लाने के लिए एक जगह और एक ही पैटर्न पर पासपोर्ट बनाने का निर्णय लिया गया। इसी कारण जिलों के पासपोर्ट सेंटर बंद किए गए हैं।
एक माह में औसतन 2200 से 2300 पासपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में एक माह में औसतन 2200 से 2300 पासपोर्ट बन रहे हैं। पासपोर्ट बनाने वालों में ज्यादातर कांगड़ा, ऊना व हमीरपुर के लोग शामिल हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्र के खुलने से एक ही दिन में लोगों को पासपोर्ट ग्रांट हो रहा है। पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन मांगी जाती है और उसके बाद उन्हें सेवा केंद्र में आने का समय दिया जाता है।