शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार सितंबर के आखिर या अक्टूबर के पहले सप्ताह में विधानसभा सत्र बुला सकती है। शुक्रवार को सचिवालय में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह बात की। मुख्यमंत्री ने शर्त रखी है कि सदन चलने देने के लिए विपक्ष को सहयोग को भरोसा देना होगा। उन्होंने कांगड़ा के संासद और भाजपा नेता शांता कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कभी भी विधानसभा सत्र में गतिरोध की स्थिति नहीं बनी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विधानसभा सत्र चलाना चाहती थी, लेकिन विपक्ष सत्र को चलने नहीं दिया। पहले बजट सत्र में और उसके बाद मानसून सत्र में लगातार विरोध किया। सदन में चर्चा करने के बजाय केवल हो हल्ला किया, जिससे तमाम महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सदन में चर्चा नहीं हो पाई। यह तसवीर प्रदेश के लिए बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष सदन चलने का भरोसा दे तो सत्र अगले माह बुलाया जा सकता है। एक सवाल के जवाब में वीरभद्र सिंह ने कहा कि संसाधनों को देखते हुए टांडा को एम्स बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। अगर केंद्र सरकार चाहे तो मंडी स्थित ईएसआईसी अस्पताल को एम्स बना सकती है। इस पर प्रदेश सरकार की ओर से किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार फजूल के सरकारी खर्चे को नियंत्रण करने के पक्ष में है। इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। हालांकि प्रदेश का विकास किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होगा।