फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजीकृत पशुओं का ही सीधा इलाज

Tue, 19 Aug 2014 05:30 AM IST
Shimla
विज्ञापन
विज्ञापन
शिमला। प्रदेश के वेटरनरी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में पंजीकृत पशुओं का ही सीधा इलाज होगा। अगर पशु पंजीकृत नहीं है तो उसका इलाज आपात स्थिति में तो होगा, मगर तत्काल पंजीकरण करवाना होगा। इसके लिए पशु उपचार संस्थान की तरफ से संबंधित पंचायत को सूचित किया जाएगा। सरकार ने यह प्रावधान नई आवारा पशु रोधी नीति मेें किया है।
विज्ञापन

प्रदेश में आवारा पशुओं की संख्या लगभग 32 हजार है। इनके मालिकों का अता-पता नहीं है। ये सड़कों पर या तो लावारिस घूमते हैं या फिर खेतों में फसलोें को नुकसान करते हैं। राज्य में पालतू पशुओं की संख्या लगभग 50 लाख है। मुर्गियों से लेकर गाय, भैंस, भेड़, बकरी आदि शामिल हैं। पशुपालकाें की संख्या भी लाखों में है। लावारिस पशुओं में केवल गाय-बैल ही हैं। नई पॉलिसी में प्रावधान है कि वेटरनरी संस्थानों में पशुओं के इलाज को रजिस्ट्रेशन जरूरी होगी। इसी नीति के हिसाब से पशुुओं के पंजीकरण के सभी कायदे कानून बदले जा रहे हैं। इसके दृष्टिगत प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम 2006 में संशोधन की तैयारी है। इसमें तय हुआ है कि अगर कोई व्यक्ति बिना पंजीकरण के पशु को इलाज के लिए वेटरनरी संस्थान में लाता है तो उसके पशु का आपात स्थिति में इलाज तो होगा, मगर उसका तत्काल पंजीकरण करना होगा। इसके लिए संबंधित पंचायत के वेटरनरी पशु सहायक को सूचित किया जाएगा। अगर कोई पंजीकृत पशु सड़क पर आवारा पाया गया तो मालिक को कैद से लेकर जुर्माना तक हो सकता है।
---
इलेक्ट्रानिक पहचान होगी पशुओं की
राज्य में पंजीकृत पशुओं की इलेक्ट्रॉनिक पहचान होगी। इसके लिए पंजीकृत पशुओं में माइक्रो चिप लगाने पर विचार चल रहा है। अभी तक कान में टैटू लगाया जाता है। कई लोग पशुओं को आवारा छोड़ने से पहले पशुओं के कान से टैटू लगे हुए हिस्से को काट देते हैं। इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाने के बाद अब ऐसा नहीं कर सकेंगे।
विज्ञापन

---
नई आवारा पशु रोधी नीति में यह प्रावधान है कि केवल पंजीकृत पशुओं का ही वेटरनरी संस्थानों में सीधा इलाज होगा। इसे कैसे लागू किया जाना है, जल्द इसके नियम कायदे स्पष्ट होंगे।
विज्ञापन

- डा. केएस पठानिया, निदेशक, राज्य पशुपालन विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें