शिमला। देश की पहली ई-विधानसभा बनी हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पहले दिन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह समेत मंत्री और कांग्रेस विधायक पेपर लेस कार्यवाही के बदले अपनी सीटों पर लगे लैपटॉप पर ई-कार्यवाही तलाशते रहे। वे कार्यवाही के दौरान कंप्यूटर विशेषज्ञों की मदद लेते रहे। विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल ने किसी विशेषज्ञ की मदद नहीं ली।
वैसे सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होनी थी, मगर लगभग सारे विधायक समय से काफी पहले पहुंचकर लैपटॉप की जानकारी लेने में जुट गए। भाजपा विधायक जय राम ठाकुर तो सुबह 9:50 बजे ही सीट पर पहुंच गए थे और लैपटॉप की जानकारी ली। स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल भी 10:30 बजे अपनी सीट पर बैठकर ई-विधान की जानकारी लेकर चले गए। मुख्यमंत्री ने 10:55 बजे कंप्यूटर विशेषज्ञ को बुलाकर ई-विधान की जानकारी ली। उन्होंने जैसे ही लैपटॉप पर अंगुली घुमाई और स्क्रीन पर बिजनेस देखते हुए वे खुश हो गए। उन्होंने विशेषज्ञ को हिदायत दी कि वे उनके पास ही खड़े रहें। शोक प्रस्ताव पर चर्चा होती रही और मंत्री, विधायक अपनी ई-विधान की जानकारी लेते रहे। कांग्रेस विधायक अजय महाजन और मंत्री जीएस बाली ने कंप्यूटर विशेषज्ञ की मदद ली। मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने साथ बैठीं मंत्री विद्या स्टोक्स को स्क्रीन चलाने में मदद की, मगर स्टोक्स ने बाद में कंप्यूटर विशेषज्ञ की मदद ली। विधायक नंदलाल ने पास बैठे सीपीएस इंद्रदत्त लखनपाल से ई-विधान के बारे में पूछा। मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी को मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने स्क्रीन चलाने की जानकारी दी। कांग्रेस विधायक नीरज भारती ने विशेषज्ञ की मदद ली। मुख्यमंत्री ने 12:20 बजे विशेषज्ञ को बुलाकर फिर स्क्रीन बारे कुछ पूछा और मुस्कुराए। बाद में विद्या स्टोक्स ने भी विशेषज्ञ की जानकारी ली। भाजपा के ईश्वर दास धीमान ने भी विशेषज्ञ को बुलाकर मदद ली। भाजपा के रविंद्र रवि को पास बैठे भाजपा के जय राम ठाकुर ने बताया कि कैसे स्क्रीन ऑफ होती है और अंगुली टच कर कैसे ऑन होती है। करीब पौने एक बजे कांग्रेस के कर्ण सिंह ने भी विशेषज्ञ की मदद ली। अधिकतर भाजपा विधायक खुद ही टच स्क्रीन चलाने में मशगूल रहे।
कौल सिंह ने दी बधाई
भाजपा विधायकों के वाकआउट के फौरन बाद मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने वाकआउट को गैरवाजिब बताया और साथ में विधानसभा अध्यक्ष को ई-विधान के लिए बधाई दे डाली। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा देश में पहली ई-विधानसभा बन गई है। यह बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश कई मामलों में नंबर एक है।
भरसक प्रयास करने पड़े
स्पीकर ने कहा कि उनके भरसक प्रयास से यह सफल हो सका है। इस प्रयास से करोड़ों रुपये की बचत होगी। हो सकता है कि शुरू में विधायकों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़े, मगर दो चार बार प्रयोग करने के बाद आसान हो जाएगा। तब तक पहले की तरह हार्ड कॉपी का प्रावधान मुख्यमंत्री के कहने पर किया गया है।