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देवभूमि में सुरक्षित नहीं बेटियां

Mon, 04 Aug 2014 05:30 AM IST
Shimla
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शिमला। देवभूमि हिमाचल में नाबालिग बच्चियां हवस की शिकार बन रही हैं। प्रदेश में पिछले छह माह में दुराचार के 132 मामलों में से 63 बच्चियां नाबालिग थीं, जबकि 69 महिलाएं 18 साल से ऊपर की रही हैं। भयावह बात यह है कि 95 फीसदी मामलों में परिचित पर ही दुराचार के आरोप हैं। ये मामले वर्ष 2014 में जनवरी माह से 30 जून तक सामने आए हैं। बीते वर्ष 729 और इस वर्ष 728 मामले प्रदेश के विभिन्न थानों में दर्ज हुए हैं। मामलों की गंभीरता को देखते हुए जांच किस दिशा में जा रही है, दुराचार की शिकार बच्चियां और महिलाएं किस हाल में हैं, इससे संबंधित हर जानकारी संबंधित जिलों से एसपी के माध्यम से पुलिस मुख्यालय को प्रमुखता से भेजनी होती है। इन मामलों पर नजर रखने को मुख्यालय में आईजी की नियुक्ति की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर मामलों में आरोपी परिचित ही हैं। ऐसे में इन मामलों में पारिवारिक परिवेश भी बहुत हद तक जिम्मेवार रहता है।
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छह महीने में दर्ज मामले
मर्डर - 18
गैर इरादतन हत्या - 01
दुराचार - 132
दहेज हत्याएं - 02
अपहरण -125
मोलेस्ट्रेशन - 208
हत्या के लिए उकसाना - 32
क्रूरता की शिकार - 170
चेन स्नेचिंग - 02
छेड़खानी - 34
इमॉरल ट्रैफिकिंग - 04
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एसएमएस से करें शिकायत
महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को पुलिस विभाग एसएमएस सेवा चला रहा है। इसके लिए 9459100100 हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। इसके माध्यम से महिलाएं थानों में जाए बिना एसएमएस से ही शिकायत कर सकती हैं। इस आधार पर थानों में एफआईआर दर्ज होती है। हेल्पलाइन नंबर पर आई शिकायतों का स्टेटस पुलिस प्रमुख को आधे घंटे के भीतर देना होता है।
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प्रदेश में महिलाओं पर हो रहे आपराधिक मामलों में इजाफा हो रहा है। विभाग कई एहतियातन कदम उठा रहा है। थानों मेें महिला कांस्टेबलों के अलावा सभी जिलों में वुमन सेल चल रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश में दो महिला पुलिस थाने खोलना भी प्रस्तावित है।
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- संजय कुमार, डीजीपी, हिमाचल प्रदेश पुलिस।
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