शिमला। हिमाचल में मनरेगा योजना ठप हो गई है। केंद्र सरकार ने हिमाचल का मनरेगा बजट रोक दिया है। इससे प्रदेश की सभी 3243 ग्राम पंचायतों में न तो कामगारों को समय पर दिहाड़ी दी जा पा रही है और न ही इसके लिए सीमेंट, रेत आदि सामग्री को खरीदने के लिए पैसे हैं। प्रदेश में 11 लाख 75 हजार जॉब कार्डधारकों को ‘जॉब’ नहीं मिल पा रही है। राज्य में मनरेगा का 60 फीसदी से अधिक बजट कृषि जबकि अन्य विकास कार्यों में खर्च हो रहा है।
केंद्र की यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हिमाचल मेें चरमरा गई है। मार्च माह के बाद इस वित्त वर्ष में इस योजना के तहत 98 करोड़ रुपये आए थे। यह खर्च हो गए हैं। 20 करोड़ रुपये मनरेगा दिहाड़ीदारों और कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के बकाया पड़े हैं। इसे नहीं दिया जा पा रहा है। बाकी कुछ नए कार्यों को शुरू करने के लिए कम से कम 20 करोड़ रुपये की तुरंत जरूरत है। इसके अलावा 100 करोड़ रुपये से अधिक की शेल्फ तो लंबित पड़ी हुई हैं।
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‘केंद्र की यूपीए सरकार ने मनरेगा का बजट रोक दिया है। इससे योजना ठप है। जो मिला था, वह खर्च हो चुका है। हिमाचल को मनरेगा योजना जारी रखने को तत्काल 40 करोड़ रुपये की जरूरत है। केंद्र से मांग के बावजूद यह बजट भी नहीं भेजा जा रहा है।’
- अनिल शर्मा, ग्रामीण विकास मंत्री, हिमाचल सरकार।