शिमला। वर्ष 1998-1999 में अस्पताल फर्नीचर और अन्य उपकरणों की खरीद के घोटाले में विशेष न्यायाधीश (वन) शिमला ने हिमाचल के तत्कालीन स्वास्थ्य निदेशक करतार सिंह सोहल, वरिष्ठ सहायक पवन कुमार सूद और नई दिल्ली के हितेश कुमार नरोला को दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में सह अभियुक्त बनाए गए पूर्व स्वास्थ्य निदेशक सुखराम चौहान को अदालत ने बरी कर दिया है। उक्त तीनों पर अनाधिकृत सप्लायर से अस्पताल फर्नीचर एवं अन्य उपकरण खरीदने का आरोप था।
डीआईजी विजिलेंस अरविंद शारदा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विशेष न्यायाधीश वन ने करतार सिंह सोहल और पवन कुमार सूद को आईपीसी की धारा 120 बी के तहत 2 साल की कैद तथा 20 हजार का जुर्माना, आईपीसी की धारा 420 के तहत 2 साल की कैद व 20 हजार का जुर्माना तथा पीसी एक्ट की धारा 13(2) के तहत 1 साल की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। प्राइवेट फर्म हितेश कुमार नरोला को आईपीसी की धारा 120 बी के तहत 2 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, आईपीसी की धारा 420 के तहत 2 साल की कैद और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। मंगलवार को अदालत ने अपना यह फैसला सुनाया। इनके खिलाफ 28 मई 2001 को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 120 और पीसी एक्ट 1988 की धारा 13 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।