शिमला। अभी बीस दिन ही बीते हैं कि हिमाचल में दूसरे बड़े़ बस हादसे ने फिर से झकझोर दिया है। सिरमौर जिले में हुए इस हादसे ने एक बार फिर से पहाड़ी सफर के लिए सड़कों और इस पर परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
अभी 26 मई को ठियोग में देहा के पास एक बस हादसे में 14 लोगों की मौत की खबर ठंडी भी नहीं हुई कि अब इस नए हादसे ने फिर से हिला दिया है। हिमाचल में दुर्घटनाएं होने के बाद ही सरकार हरकत में आती है। आनन-फानन में बड़ी-बड़ी बातें होती हैं और एकाएक सबकुछ ठंडा हो जाता है। परिवहन मंत्री ने नेरी हादसे के बाद 100 दिनों में परिवहन नीति पर सुझाव मांगे। अभी सुझाव आने ही लगे थे कि इस बीच नए हादसे ने फिर पहाड़ी सफर को बदनाम कर दिया है। हिमाचल में पुलिस विभाग ने सड़कों पर 314 ब्लैक स्पाट चिन्हित कर रखे हैं। इन पर रोड सेफ्टी कमेटियां बड़ी-बड़ी चर्चाएं कर चुकी हैं, मगर नतीजा कोई नहीं। हाल ही में एक संस्था ने 461 नए-पुराने हादसों के लिहाज से संवेदनशील स्थलों की रिपोर्ट तैयार की है। पर ऐसे स्थलों का एकदम कोई उपचार नहीं।
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छह माह में हो चुके हैं 1515 हादसे
पिछले छह महीनों में हिमाचल में छोटे-बड़े लगभग 1515 हादसे हो चुके हैं। इन्हीं में बस दुर्घटनाएं भी हैं। एक दिसंबर से लेकर अब तक इन हादसों में तकरीबन 400 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। लगभग 3500 लोग इस बीच जख्मी हो चुके हैं। प्रदेश में हर साल औसतन 3300 के करीब हादसे हो रहे हैं।