शिमला। हिमाचल प्रदेश में खेतीबाड़ी को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली टैरिफ में विशेष छूट दी गई है। बढ़ती महंगाई की मार से उबारने के लिए भी एक कोशिश की है, जिससे प्रदेश में अनाज की पैदावार बढ़ाने में मदद मिल सके। टैरिफ में किसानों के डिमांड चार्ज को 80 से घटाकर 40 रुपये प्रति केवीए (किलो वोल्ट एंपीयर) प्रति माह की गई है। इससे प्रदेश के छोटे किसानों को प्रति माह तीन सौ से चार सौ रुपये की बचत होगी।
छोटे किसान अपने खेतों की सिंचाई करने के लिए नलकूप चलाए या न चलाएं। उन्हें डिमांड चार्ज के तौर पर 80 रुपये प्रति केवीए की दर से भुगतान करना पड़ता था। इससे किसानों पर सालाना तीन से पांच हजार रुपये की अतिरिक्त मार पड़ रही थी। विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश के हजारों किसानों को राहत देने का कदम उठाया है। यह लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जोकि नदी, नालों से पानी लिफ्ट करके अपने खेतों की सिंचाई करेंगे। जमीन के भीतर से यानी अंडर ग्राउंड पानी से खेतों की सिंचाई करने की स्थिति में यह लाभ नहीं मिलेगा। इसके पीछे आयोग का तर्क है कि अंडर ग्राउंड पानी निकासी से भू-जल स्तर नीचे जा रहा है, जोकि भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे में किसान उस पानी को इस्तेमाल करें, जोकि बहकर बेकार हो रहा है। छोटे किसानों को बिजली दरों में तो कोई राहत नहीं दी गई है, लेकिन बड़े किसानों, उद्यान, पाली हाउस मछली पालन या फूलों की खेती करने वाले बड़े किसानों को बिजली दरों में 20 से 30 पैसे प्रति यूनिट की छूट दी गई है।
कोट
प्रदेश की नदियों और नालों से बड़े पैमाने में पानी बह रहा है, जिसका इस्तेमाल नहीं हो पाता। उसका उपयोग बढ़ाने के लिए छोटे किसानों के लिए डिमांड चार्ज पहले के मुकाबले आधा कर दिया गया है। इससे हर महीने छोटे और मझोले श्रेणी के किसानों को काफी लाभ मिलेगा। इससे प्रदेश में खेती को प्रोत्साहित करने में भी मदद मिलेगी। - सुभाष नेगी, चेयरमैन राज्य विद्युत नियामक आयोग, हिमाचल प्रदेश