शिमला। प्रदेश में मनरेगा की दिहाड़ी रोकने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर गाज गिरेगी। राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा ने कहा है कि इस लेटलतीफी के लिए जिम्मेवार अधिकारियों और कर्मचारियों से रिकवरी भी की जा सकती है। कामगारों को देय दिहाड़ी के साथ मुआवजा दिया जाएगा। सभी कामगार अपनी-अपनी पंचायतों में क्लेम करें। उन्होंने यह कड़ा संज्ञान ‘अमर उजाला’ में शनिवार को छपी खबर ‘24 पंचायतों ने रोकी मनरेगा की दिहाड़ी’ पर लिया है। आरटीआई सूचना के आधार पर छपी इस खबर पर मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि इसकी पूरी तहकीकात होगी कि यह दिहाड़ी क्यों नहीं दी जा सकी है। सरकार मनरेगा योजना को पूरी तरह से धरातल पर लागू करने को कृतसंकल्प है। इसमें किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। मनरेगा एक्ट में यह प्रावधान है कि कामगारों को दिहाड़ी काम करने के 15 दिन के भीतर दी जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो इसके बाद दिहाड़ी के साथ मुआवजा देना होगा। इसे मस्टररोल बंद होने के 15 दिन के बाद से आगामी 15 दिनों की देरी तक दिहाड़ी का एक चौथाई और 30 दिन के बाद विलंब दिवस तक दिहाड़ी का आधा देना होगा।
---
पांच अन्य पंचायतों में 1090 को नहीं मिली दिहाड़ी
शिमला। हिमाचल की पांच अन्य पंचायतों में भी 1090 कामगारों को वित्त वर्ष 2013-14 के जनवरी, फरवरी और मार्च माह की मनरेगा दिहाड़ी नहीं दी गई है। विकास खंड नगरोटा बगवां की सरोत्री पंचायत में 47, विकास खंड ठियोग की पंचायत केलवी मेें 180, घूंड में 771, गोहर की पंचायत मशोगल में 24 और छपराहण में 68 कामगारों की दिहाड़ी रुकी हुई है। यह बात शनिवार को आरटीआई से प्राप्त सूचना से सामने आई। इस हिसाब से अब तक मनरेगा की दिहाड़ी नहीं देने वाली कुल पंचायतों की संख्या 29 और वंचित कामगारों की संख्या 2478 हो गई है।