शिमला। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत प्रदेश सरकार का रिसर्च एंड इनोवेशन प्लान मंजूर नहीं हुआ है। शिक्षा विभाग ने करीब 23 कॉलेजों के लिए रिसर्च, इनोवेशन एंड क्वालिटी इंप्रूवमेंट में 11 करोड़ का प्रस्ताव भेजा था। प्लान मंजूर होता तो हर कॉलेज को 50 लाख मिलने थे। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड के साथ सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक में प्रदेश ने 17 तरह की मांगें (कोंपोनेंट) के तहत प्रस्ताव प्र्रस्तुत किया। इनमें अधिकतर मांगों को बोर्ड ने नहीं माना। इनमें सुविधाएं एवं सुधार, उच्चतर शिक्षा का वोकेशनलाइजेशन, फैकल्टी रिक्वायरमेंट, लीडरशिप डेवलेपमेंट ऑफ एजूकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन, मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम, पॉलीटेक्निकल संस्थानों को सहायता सहित तीन कोंपोनेंट केंद्र ने मंजूर नहीं किए। हालांकि, बोर्ड ने इन पर भविष्य में विचार करने का आश्वासन दिया। केंद्रीय मंत्रालय ने प्रदेश सरकार और शिक्षा की जिन मांगों को पूरा करने में हामी भरी, उनमें तीन नए कॉलेज बनाने, मंडी जिले में कलस्टर यूनिवर्सिटी, कांगड़ा में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने, एचपीयू और 25 कॉलेजों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए आर्थिक सहायता देने और शिक्षा में एकरूपता लाने के प्लान शामिल हैं। केंद्र ने मानी गईं चार मांगों के लिए तो फंड मंजूर किया, मगर 3 योजनाओं में डीपीआर देने के बाद राशि देने की शर्त लगाई है। उधर, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्र ने नए प्रोफेशनल कॉलेज और मॉडल कॉलेज खोलने, मौजूदा कॉलेजों को आधारभूत ढांचे को मजबूती देने जैसी योजनाएं तो मान लीं, पर कई महत्वपूर्ण मांगों और समस्याओं को दरकिनार किया है।