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24 पंचायतों ने रोकी मनरेगा दिहाड़ी

Sat, 14 Jun 2014 05:33 AM IST
Shimla
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शिमला। केंद्र की मोदी सरकार के सहारे हिमाचल में मनरेगा योजना कैसे चलेगी, यह तो आगे मालूम होगा, पर प्रदेश की 24 पंचायतों ने पिछले वित्तीय वर्ष में यूपीए सरकार के रहते करवाए मनरेगा कार्यों की दिहाड़ी अभी तक नहीं दी है। इनमें 1388 लोगों को दिहाड़ी नहीं दी गई। यह पोल सूचना के अधिकार ने खोली है। ग्रामीण विकास विभाग से मिली आरटीआई सूचना से साफ हुआ है कि हिमाचल की इन पंचायतों में 15 दिन में दिहाड़ी देने के मनरेगा कानून की धज्जियां उड़ी हैं।
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19 पंचायतों में यह दिहाड़ी पिछले वित्त वर्ष 2013-14 के जनवरी, फरवरी और मार्च महीने की नहीं दी गई है। कांगड़ा जिले के विकास खंड फतेहपुर की पंचायत खरोटा में 150, टकोली घिरयां में 24, कुटवाणी में 48 और समलेट में 50 कामगारों की दिहाड़ी रुकी है। कांगड़ा जिले के ही विकास खंड लंबागांव में वटाहण, हलेड, जगरूपनगर, जांगल, लंबागांव, मैला, मझेड़ा, पपलाह, स्कोह, टंबर और थुरल पंचायतों में 268 कामगारों को मनरेगा की दिहाड़ी नहीं मिली है। चंबा जिले के विकास खंड मैहला की पंचायत जांघी में 4, शिमला जिले के ठियोग विकास खंड की पंचायत कथोग में 273, संधू में 167, क्यार्टू में 235 और नहोल में 9 मनरेगा कामगारों की दिहाड़ी नहीं दी गई है। सिरमौर जिले के संगड़ाह खंड की पंचायत भवाई में 56, बिलासपुर जिले के घुमारवीं ब्लॉक में ग्राम पंचायत डंगार में 9, चंबा जिले के मैहला ब्लॉक में कीड़ी पंचायत के 12 और करीयां में 83 लोगों को दिहाड़ी नहीं दी जा सकी है।
समय पर दिहाड़ी नहीं देने का कारण इन पंचायतों ने इलेक्ट्रानिक फंड प्रबंधन प्रणाली (ई-एफएमएस) की ढील बताई गई है।

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मंत्री हैरान, जांच बैठाएंगे
इस सूचना के ध्यान में लाए जाने के बाद राज्य पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा भी हैरान हैं। वह यह मानकर चल रहे थे कि सब जगह दिहाड़ी दी जा चुकी है। अनिल शर्मा ने कहा कि मनरेगा एक्ट में 15 दिन के भीतर दिहाड़ी देने का प्रावधान है। वे इस पर जांच बैठाएंगे कि इसमें किसने गड़बड़ी की।
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