शिमला। थलौट में 25 लोगों की जान जाने के बाद अब बिजली बोर्ड और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के अफसरों को बचाने की भूमिका तैयार हो गई है। सोमवार को प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी ने बिजली बोर्ड के अफसरों के साथ प्रदेश सचिवालय में बैठक की। नेगी बोर्ड के चेयरमैन भी हैं। बैठक में बिजली बोर्ड के अफसरों के अलावा निदेशक ऊर्जा आरडी नजीम भी शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।
इस रिपोर्ट में लारजी डैम से अचानक पानी छोड़ने के फैसले को सही बताया गया है। मीडिया से बातचीत में प्रधान सचिव (ऊर्जा) एसकेबीएस नेगी ने बताया कि गर्मी अचानक बढ़ने से बर्फ पिघलने की गति अचानक तेज हो गई थी। डैम में पानी काफी हो गया था। रविवार को ही पार्वती प्रोजेक्ट से छोड़ा गया पानी भी डैम में आ गया। इसके बाद डैम का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था। बिजली उत्पादन बढ़ने के कारण ग्रिड में भी लोड फ्रीक्वेंसी बढ़ गई थी। इसलिए हमें जनरेशन करेक्ट करने को कहा गया।
स्टेट लेवल लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) ने बिजली उत्पादन घटाकर डैम से पानी छोड़ने को कहा। ऐसा नहीं करते तो लारजी के पावर हाउस को नुकसान हो जाता। प्रोजेक्ट से 6.15 बजे के बाद तीन किस्तों में 50, 150 और 250 क्यूसिक पानी छोड़ा गया। इसके बाद पावर हाउस दोबारा शुरू हो गए थे। नेगी ने दावा किया कि पानी छोड़ने से पहले सायरन बजाया गया था। उन्होंने इस हादसे को दुखद बताया। नेगी ने कहा कि दो इंजीनियरों को सरकार ने सस्पेंड कर दिया है और घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ जरूरी कार्रवाई होगी।