शिमला। थलोट हादसे ने एक बार फिर लारजी डैम प्रबंधन और हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड की लापरवाही की कलई खोल दी है। एक के बाद एक हादसा होने के बावजूद आज तक नदी के किनारे न तो फेंसिंग की व्यवस्था की गई है और न ही गायब हो चुके चेतावनी बोर्ड दोबारा लगाए गए। लारजी डैम से सायरन बजाया ही नहीं गया। बजाया भी होता तो तीन किमी दूर सायरन किसे सुनाई देता। घटना के बाद अब डैम प्रबंधन से लेकर बिजली बोर्ड और सरकार के अफसर अपनी खाल बचाने में जुट गए हैं।
कोट
जहां पर हादसा हुआ है, वहां पर कोई चेतावनी बोर्ड नहीं था। सायरन की आवाज भी शायद घटना स्थल तक पहुंच पाती। अब इस हादसे के बाद सायरन की संख्या बढ़ाई जाएगी। आवाज तेज की जाएगी। साथ ही कुछ क्षेत्रों में फेंसिंग भी की जाएगी। - पीसी नेगी, प्रबंध निदेशक विद्युत बोर्ड लिमिटेड, हिमाचल प्रदेश
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निश्चित तौर पर एक बड़ी घटना है। अब सरकार की ओर से निर्देश दिया जाएगा कि जहां खुला है, उन क्षेत्रों में फेंसिंग की जाए। चेतावनी बोर्ड लगाए जाए। - एसकेबीएस नेगी, प्रधान सचिव ऊर्जा
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संडे को डैम से कब कितना छोड़ा पानी
शाम सवा छह बजे -- 50 क्यूमैक्स
शाम साढ़े छह बजे -- 150 क्यूमैक्स
शाम पौने सात बजे -- 250 क्यूमैक्स
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ये होना चाहिए था
- अलग-अलग चेतावनी बोर्ड लगने चाहिए
- आसपास सायरन की संख्या अधिक हो
- कुछ स्थानों पर फेंसिंग होनी चाहिए थी
- सुरक्षा कर्मियों की तैनात होनी चाहिए थी