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11 हजार गांवों को नहीं मिले वनाधिकार

Mon, 09 Jun 2014 05:33 AM IST
Shimla
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शिमला। हिमाचल में 11000 राजस्व गांवों को वनाधिकार नहीं मिल पाए हैं। ग्राम सभाओं में कोरम पूरा नहीं होने के कारण इन गांवों में वनाधिकार कमेटियां बन ही नहीं सकी हैं। ये कमेटियां वनाधिकार अधिनियम के तहत बनाई जानी हैं। यही कमेटियां आगे से गांवों में सड़क निर्माण करने, अवैध निर्माण आदि किसी भी तरह की बाहरी गतिविधि के लिए भूमि देने के निर्णय लेंगी। इनकी मंजूरी के बिना उपायुक्त भी स्वीकृति नहीं भेज सकेंगे।
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भले ही भारतीय वनाधिकार अधिनियम 2006 की केंद्र सरकार की नई व्यवस्था को हिमाचल में वर्ष 2011 से लागू करने का बीड़ा उठाया गया। पर इसके तहत कमेटियां नहीं बन पाई हैं। ये सभी 3243 ग्राम पंचायतों में लगभग 20 हजार राजस्व गांवों में बननी हैं। इनमें से 9 हजार कमेटियां ही बन सकी हैं। बाकी कमेटियों को बनाने का काम ढीला चल रहा है। प्रत्येक कमेटी में एक प्रधान और एक सचिव तथा आठ सदस्य होंगे। इसका पदेन सदस्य प्रधान होगा। महिलाओं और अनुसूचित जाति के लोगों के लिए भी इसमें उचित प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई है।
राज्य पंचायती राज विभाग के संयुक्त सचिव केवल शर्मा ने कहा है कि हिमाचल में वन अधिकार कानून के तहत कमेटियां बनने का काम इसलिए ढीला चला है, क्योंकि ग्राम पंचायतों में कोरम पूरे नहीं हो पा रहे हैं। इसके दृष्टिगत हर ग्राम सभा में प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने माना है कि अभी तक 9 हजार समितियां ही बन पाई हैं।
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30 फीसदी ग्राम पंचायतों में पूरे नहीं हुए कोरम
शिमला। रविवार को भी प्रदेश भर की 3243 ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया, मगर इनमें से 30 फीसदी ग्राम पंचायतों में कोरम पूरे नहीं हो पाए। ये ग्राम सभाएं निर्मल भारत अभियान के तहत लोगों को स्वच्छता को लेकर जागरूक करने को लेकर हुईं। कई ग्राम पंचायतों में वनाधिकार कमेटियां भी बनीं। इन ग्राम सभाओं में सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। संयुक्त सचिव केवल शर्मा ने बताया है कि रविवार को रखी गई ग्राम सभाओं में निर्मल भारत अभियान सहित विभिन्न मसलों पर चर्चा हुई है।
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