शिमला। हिमाचल में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जंगलात महकमे की ओर से ‘क्षमता विकास परियोजना’ जनवरी 2015 में लांच की जाएगी। इसके लिए जर्मनी सरकार की ओर से लगभग 25 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा। इस रकम से जनता से लेकर वन कर्मियों तक को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिसके जरिये पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम किया जाएगा।
बान (ओख) के जंगल लगाने से किस तरह पर्यावरण और आम आदमी को लाभ होंगे। चीड़ के जंगल से किस तरह के नुकसान हो रहे हैं। किस तरह से जैव विविधता की संरक्षण करने की जरूरत है। इसके लिए तीन साल तक कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में आसानी हो सके। जंगलात महकमे की अफसरों की मानें तो चीड़ के जंगल से तापमान में साल दर साल बढ़ोत्तरी हो रही है। इसका असर सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन पर पड़ रहा है, जिससे निपटने के लिए जंगलात महकमे की ओर से ‘क्षमता विकास परियोजना’ की लांचिंग जनवरी 2015 में करने की तैयारी है। हिमाचल प्रदेश के वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने बताया कि इस परियोजना को लेकर लगभग पूरी तैयारी हो चुकी है। जर्मनी से अनुदान आते ही इसकी शुरुआत कर दी जाएगी। अगले तीन साल तक यह योजना प्रदेश में संचालित की जाएगी।