शिमला। प्रदेश में स्वैच्छिक परामर्श एवं जांच केंद्र (आईसीटीसी) खोलने का प्रस्ताव दो साल से राजनीति में उलझकर रह गया है। सूबे में 18 स्थानों पर ये केंद्र खोले जाने थे। यह तसवीर तब है, जब राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की ओर से पूरा बजट मुहैया कराया जाना था। प्रदेश में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या सात हजार से अधिक है। इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, लेकिन प्रदेश में खुलने वाले स्वैच्छिक परामर्श एवं जांच केंद्र राजनीति में उलझकर रह गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से प्रदेश में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जा सकता है। नए मरीजों को समय रहते जांच और परामर्श देकर मानसिक तौर पर मजबूत किया जा सकता है, लेकिन इस पर प्रदेश स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इससे सीधे तौर पर राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी से लेकर सूबे की सरकार तक पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीपीपी मोड पर केंद्र खुलेंगे
राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से पीपीपी मोड पर ज्वालाजी और पालमपुर में दो केंद्र स्थापित करने की तैयारी है, जिससे एचआईवी पॉजिटिव और एड्स के मरीजों को सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें।
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उद्योगों से भी मदद
राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी ने औद्योगिक इकाइयों से भी मदद की कवायद शुरू की है। दो इकाइयों से वार्ता चल रही है। इसके माध्यम से उनके द्वारा स्थापित अस्पतालों में एक लैब टेक्नीशियन और अन्य स्टाफ को प्रशिक्षित किया जा सके। उनके माध्यम से मरीजों को सलाह दी जाए।
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एचआईवी और एड्स के मरीजों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य में 19 स्थानों पर सुविधा केंद्र स्थापित किए गए है। एक अस्पताल के एक लैब टेक्नीशियन और एक स्टाफ सदस्य को प्रशिक्षित किया गया है। जहां तक आईसीटीसी की बात है। इसके लिए भी कवायद चल रही है, लेकिन अभी कुछ कहना संभव नहीं है।
- डा. पीसी शर्मा, परियोजना निदेशक; राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी